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युवाओं से बोले पीएम मोदी, पहले कुछ नहीं बताता,धीरे-धीरे खोलता हूं पत्ते

Posted on: 27 Feb 2019 14:08 by Mohit Devkar
युवाओं से बोले पीएम मोदी, पहले कुछ नहीं बताता,धीरे-धीरे खोलता हूं पत्ते

बुधवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित युवा संसद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए. उनके वहां पहुंचते ही लोगों ने जोरदार तरीके से उनका स्वागत किया. भारत माता की जय के साथ मोदी-मोदी के नारे भी लगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा संसद में कहा कि युवाओं को अपने साथ जोड़ने की हमेशा से मेरी कोशिश रही है. युवा संसद इसी का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि आप जैसे युवा साथियों से मिलता हूं तो आपसे मिलने वाली उर्जा अपने अंदर महसूस करता हूं. आज मेरे सामने न्यू इंडिया की नई तस्वीर है.

पुलवामा हमले के बाद भारत की ओर से मंगलवार को तड़के हुई बड़ी कार्रवाई सर्जिकल स्ट्राइक 2 की तरफ इशारा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सब चीजें पहले नहीं बताता हूं, धीरे-धीरे खोलता हूं. उन्होंने कहा कि मेरा टोकनिज्म में विश्वास नहीं है. एक लंबी सोच के साथ एक के बाद एक इंटरलिंग व्यवस्थाएं विकसित करना ये मेरी कार्यशैली का हिस्सा है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपने को उड़ने देना चाहिए, क्योंकि युवाओं पर अतीत का बोझ नहीं होता और वह भविष्य की चुनौतियों से निपटने में ज्यादा सक्षम होता है.

अपने काव्यात्मक अंदाज में मोदी ने कविता की दो लाइनें कही कि उसे गुमां है कि मेरी उड़ान कुछ कम है, मुझे यकीं है ये आसमां कुछ कम है और उन्होंने द्वारिका प्रसाद द्विवेदी की पंक्तियां कही कि इतने उंचे उठो कि जितना उठा गगन है, इतने मौलिक बनो कि जितना स्वयं सृजन है. उन्होंने कहा कि सिलेबस में बंधे हुए लोग यहां नहीं आते। आप यहां पहुंचे हैं यानि कि सिलेबस से बाहर भी कुछ पढ़ते हैं। और भरोसा है कि आप मुझे भी पढ़ते होंगे.
संसद में मोदी से सवाल करते हुए दिल्ली से शशांक गुप्ता ने पूछा कि एजुकेशन के लिए कई योजनाएं हैं, लेकिन इनकी पहुंच जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक और पूर्वोत्तर से गुजरात तक कैसे पहुंचे? इस सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि योजनाएं तो पहले की सरकारों ने भी बनायी, लेकिन उसकी उपयोगिता सुनिश्चित करनी चाहिए. हमारी सरकार ऐसा कर रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि बिना किसी की हकमारी किए बिना हमने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए 10 फीसदी आरक्षण को लागू किया। हमारे मुंह से निकला हुआ शब्द सही जगह पर तीर की तरह जाना चाहिए। हमारी वाणी इम्प्रेसिव हो या न हो, लेकिन इंसपायरिंग जरुर होनी चाहिए.
युवा संसद में तीनों पुरस्कार पाने वाली युवतियों को बधाई देते हुए कहा कि तीनों बेटियों को लाख- लाख बधाइयां। तीनों बेटियों ने मैदान मार लिया. उन्होंने युवाओं से कहा कि वो दिन दूर नहीं होगा कि आपलोगों की ओर से मांग आएगी कि तीन पुरस्कार देते हैं, तो पुरुषों के लिए एक रिजर्वेशन दिया जाए.

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