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पितृपक्ष: जानिए कौवे और श्वान का महत्व जब धरती पर आते हैं पूर्वज

Posted on: 29 Sep 2018 14:18 by shilpa
पितृपक्ष: जानिए कौवे और श्वान का महत्व जब धरती पर आते हैं पूर्वज

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श्राद्ध पक्ष का संबंध मृत्यु से होता है। आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष कहलाता है। इस मौके पर पितर मृत्यु लोक से धरती पर 16 दिनों के लिए धरती पर आते हैं। पितृ पक्ष में किये गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है।

पितृपक्ष में ब्राह्राण, गाय ,कौए और श्वान का महत्व हैं।
श्राद्ध पक्ष में पितरों के अलावा ब्राह्राण,गाय, श्वान और कौए को ग्रास निकालने की परंपरा है। पितृपक्ष में इनका खास ध्यान रखने की परंपरा है। गाय में देवी-देवताओं का वास होता है इसलिए गाय का महत्व है। वहीं पितृपक्ष में श्वान और कौए पितर का रूप होते हैं इसलिए उन्हें ग्रास देने का विधान है।

कुछ शुभ संकेत
1.अगर कौआ अपनी चोंच में सूखा तिनका लाते दिखे तो धन लाभ होता है।
2.कौआ अनाज के ढेर पर बैठा मिले, तो धन लाभ होता है

3.अपने घर के आसपास अगर आपको कौए की चोंच में फूल-पत्ती दिखाई दे जाए तो मनोरथ की सिद्धि होती है।

4.अगर कौआ गाय की पीठ पर चोंच को रगड़ता हुआ दिखाई तो समझिए आपको उत्तम भोजन की प्राप्ति होगी।
5.अगर सूअर की पीठ पर कौआ बैठा दिखाई दें, तो अपार धन की प्राप्ति होती है।

6.अगर कौआ मकान की छत पर या हरे-भरे वृक्ष पर जाकर बैठे तो अचानक धन लाभ होता है।
7.यदि कौआ बाईं तरफ से आकर भोजन ग्रहण करता है तो यात्रा बिना रुकावट के संपन्न होती है। वहीं कौआ पीठ की तरफ से आता है तो प्रवासी को लाभ मिलता है।

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