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पीएफएस- 30 जून 2018 को समाप्त तिमाही में वित्तीय प्रदर्षन

Posted on: 31 Aug 2018 11:35 by Ravindra Singh Rana
पीएफएस- 30 जून 2018 को समाप्त तिमाही में वित्तीय प्रदर्षन

वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही के प्रदर्षन पर पीटीसी इंडिया फाइनेंषियल सर्विसिस (पीएफएस) के प्रबंध निदेषक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ अषोक हल्दिया ने कहाः ’’इस तिमाही के दौरान कंपनी ने पोर्टफोलियो के समेकन व गुणवत्ता पर अपना ध्यान बरकरार रखा। कंपनी का लोन पोर्टफोलियो करीबन 22 प्रतिषत बढ़कर रु. 13,361 करोड़ हो गया है। रु. 90.43 करोड़ की षुद्ध ब्याज आय के साथ कंपनी का बिज़नेस माॅडल मजबूत बना हुआ है, यह ब्याज आय का 30 प्रतिषत है। पोर्टफोलियो में वृद्धि के लिए कंपनी रणनीतिक तरीके से उच्चतर यील्ड स्ट्रक्चर्ड प्राॅडक्ट्स की ओर अग्रसर है।’’

दबावग्रस्त सम्पत्तियों का एक बड़ा हिस्सा, जो मुख्यतः पोर्टफोलियो के लेगेसी पार्ट में हैं, समाधान के अंतिम चरणों में हैं – उम्मीद है कि वि.व.2019 में इनका हल हो जाएगा; यह हल विभिन्न माध्यमों से हो रहा है जिनमें प्रवर्तक में बदलाव, एआरसी की बिक्री या वन-टाइम सैटलमेंट षामिल हैं। नवीकरणीय व अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित निवेषों पर कोई खास दबाव नहीं है।

वित्तीय परिणामों की झलकियां
पीटीसी इंडिया फाइनेंषियल सर्विसिस लिमिटेड (पीएफएस) के निदेषक बोर्ड ने आज हुई बैठक में 30 जून 2018 (वि.व.19 की प्रथम तिमाही) को समाप्त तिमाही के बिना-आॅडिट वित्तीय परिणामों को स्वीकृति प्रदान की।

कंपनी मामले मंत्रालय द्वारा 2 जनवरी 2015 को जारी अधिसूचना के तहत पीएफएस को स्टैंडअलोन आधार पर आईएनडी एएस आधारित फाइनेंषियल स्टेटमेंट तैयार करनी है, जिसमें अकाउंटिंग अवधि 1 अप्रैल 2018 से आरंभ होगी तथा 31 मार्च 2018 को समाप्त अवधि से तुलना की जाएगी। इसके अलावा, पिछले साल (वि.व.18 की प्रथम तिमाही) के आंकड़ों में रद्दोबदल की गई है ताकि आईएनडी एएस की आवश्यकताओं को पूण कर सकें। आईएनडी एएस को अपनाने की वजह से पीएफएस के लिए हुए कुछ मुख्य बदलाव हैंः

1. ऐक्सपैक्टेड क्रैडिट लाॅस (ईसीएल) – आईएनडी एएस 109 के मुताबिक लोन असैट्स को स्टेज-1, स्टेज-2, स्टेज-3 के अंतर्गत वर्गीकृत करने की जरूरत है। स्टेज-1 में प्रदर्षन करने वाली सम्पत्तियां होंगी, स्टेज-2 वे लोन असैट्स होंगे जिन पर दबाव है और आरंभ से अब तक क्रैडिट रिस्क में इज़ाफा हुआ है और स्टेज-3 में नाॅन-परफाॅर्मिंग असैट्स होंगे। पहले सम्पत्तियों को स्टैंडर्ड या सब-स्टैंडर्ड वर्गीकृत किया जाता था जो प्रदर्षन/लोन अकाउंट के संचालन पर आधारित होता था तथा आरबीआई प्रूडेंषियल नियमों के मुताबिक होता था।

2. फीस का परिषोधन – लोन आॅरिजिनेषन फीस (परिसम्पत्तियां व उधार) जैसे प्रोसेसिंग फीस/ प्रबंधन फीस को पिछले जीएएपी में अपफ्रंट आधार पर पहचाना गया था जबकि आईएनडी एएस में ऐसी फीस का परिषोधन करना होगा जो कि लोन की अवधि पर, प्रभावी ब्याज दर माॅडल पर होगा।

3. डेरिवेटिव इंस्टूªमेंट्स – डेरिवेटिव इंस्टूªमेंट्स की पहचान व मापन लाभ या हानि के जरिए होते हैं। मार्क-टू-मार्क मुनाफा/(हानि) को लाभ व हानि के ब्यौरे में पहचाना गया है।

वि.व.2019 की प्रथम तिमाही बनाम वि.व.2018 की प्रथम तिमाही
30 जून 2018 को समाप्त तिमाही में कुल बकाया ऋण परिसम्पत्तियां 22 प्रतिषत बढ़कर रु. 13,361 करोड़ हो गईं। इसके अतिरिक्त आगामी तिमाहियों में गैर-फंड आधारित वचन रु. 1,003 करोड़ रहा है।
वि.व.19 की प्रथम तिमाही में कुल राजस्व रु. 325.19 करोड़ रहा जबकि वि.व.18 की प्रथम तिमाही में यह आंकड़ा रु. 300.13 करोड़ था।

समीक्षाधीन तिमाही में परिचालन से प्राप्त राजस्व रु. 313.83 करोड़ रहा जबकि बीते वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा रु. 299.55 करोड़ था, तो इस तरह से यह वृद्धि करीबन 5 प्रतिषत की रही।
समीक्षाधीन तिमाही में कर पूर्व लाभ रु. 84.07 करोड़ रहा जबकि बीते वि.व. की समान अवधि में यह आंकड़ा रु. 110.55 करोड़ था।

वि.व.19 की पहली तिमाही में षुद्ध ब्याज़ मार्जिन और स्प्रैड क्रमषः 2.85 प्रतिषत एवं 1.16 प्रतिषत था। इस दौरान ऋण परिसम्पत्तियों पर यील्ड 9.34 प्रतिषत रहा जबकि उधार लिए गए फंड की लागत 8.18 प्रतिषत रही। दबाव में पड़ी ऋण परिसम्पत्तियों के असर को व्यवस्थित करने पर समीक्षाधीन तिमाही के लिए यील्ड व स्प्रैड क्रमषः 10.65 प्रतिषत और 2.46 प्रतिषत रहा जबकि वि.व.18 की प्रथम तिमाही में यील्ड व स्प्रैड क्रमषः 10.98 प्रतिषत और 2.75 प्रतिषत थे। समान आधार पर शुद्ध ब्याज़ मार्जिन 4.16 प्रतिषत रहा।

30 जून 2018 को

30 जून 2018 को स्टेज-3 के तहत वर्गीकृत लोन असैट्स का मूल्य ग्राॅस रु. 1,026 करोड़ तथा शुद्ध रु. 496 करोड़ रहा – ये आंकड़े अपेक्षित क्रैडिट लाॅस को व्यवस्थित करने पर हैं। इसके अलावा, ओएसडीआर के तहत लोन असैट्स पर 55 प्रतिषत तक प्रदान किया गया, इसका आंकड़ा रु. 670 करोड़ है। अन्य अकाउंट्स के लिए अपेक्षित क्रैडिट लाॅस की रकम को पूरी तरह हिसाब में लिया गया है और ओपनिंग रिज़र्व के साथ ऐडजस्ट किया गया है।
क्यूमुलेटिव इफेक्टिव डेट सैंक्षन की रकम रु. 22,320 करोड़ है।

इस तिमाही डेट सैंक्षन (कर्ज मंजूरी) रु. 1,712 करोड़ रहा जिसमें मुख्य तौर पर रु. 1,512 करोड़ नवीकरणीय परियोजनाओं के लिए और रु. 200 करोड़ अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स जैसे सड़क आदि के लिए हैं। पिछले साल इस अवधि में डेट सैंक्षन रु. 643 करोड़ था। 30 जून 2018 को समाप्त तिमाही में कर्ज़ों का सकल वितरण रु. 1,188 करोड़ रहा जबकि 30 जून 2017 को समाप्त तिमाही में यह आंकड़ा रु. 947 करोड़ था।

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