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पेट्रोल के दाम आसमान पर, लेकिन पंप चलाना घाटे का सौदा : सुधीर ऐरन

Posted on: 02 May 2018 10:34 by Praveen Rathore
पेट्रोल के दाम आसमान पर, लेकिन पंप चलाना घाटे का सौदा : सुधीर ऐरन

इंदौर. पेट्रोल के दाम भले ही बढ़ रहे हैं लेकिन पंप चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ऑपरेशन कास्ट बढऩे से मार्जिन बहुत ही कम रह गया है। देश में सर्वाधिक राजस्व पेट्रोलियम से मिलता है, इसके बाद तंबाखू और शराब से रेवेन्यू मिलता है। अर्थव्यवस्था में ४० फीसदी योगदान पेट्रोलियम का होने के बावजूद पंप संचालकों की मांग पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है जबकि ये एक मात्र ऐसा सेक्टर हैं, जहां सरकार को रेवेन्यू जुटाने के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ता है, और सरकार के खजाने में एडवांस में टैक्स जमा हो जाता है। ये कहना है म.प्र. फेडरेशन ऑफ पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के सुधीर ऐरन का। घमासान डॉटकॉम की उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश… sudheer 1

सवाल : पेट्रोल के दाम आसमान पर हैं, क्या पंप संचालकों का कमीशन भी बढ़ा है?
जवाब : पेट्रोल-डीजल डी-कंट्रोल होने के बाद से इनके दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन इस महंगाई के जमाने में भी पेट्रोल पंप डीलरों की लागत भी पेट्रोल की तरह रोज ही बढ़ रही है। इसका सबसे कारण बढ़ा कारण है कि डीलर को कमीशन प्रति लीटर के हिसाब से मिलता है, न कि मूल्य के हिसाब से। ४ नवंबर २०१६ को तीनों कंपनियों व मंत्रालय के अधिकारियों ने एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन कमीशन बढ़ाने की मांग आज तक पूरी नहीं हुई है। जब भी डीलर कमीशन बढ़ाने की मांग करते हैं तो जांच की बात कही जाती है। 2015 -16 में आईआईएम अहमदाबाद को कमीशन कितना होना चाहिए, इसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए मामला सौंप दिया था। आईआईएम की रिपोर्ट पेट्रोल पंप डीलरों के पक्ष में आई तो मामला इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) को अध्ययन के लिए सौंप दी गई। पिछले दो साल से प्रधानमंत्री कार्यालय तक पत्राचार ही चल रहा है। जो चीजें टालना होती है, उस पर जांच आयोग बिठाने की प्रवृत्ति रही है, इसी प्रकार कमीशन कितना होना चाहिए, इस पर भी अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। आईआईएम और आईआईपी के बाद अपूर्व चंद्रा कमेटी का गठन कर दिया गया, उसकी भी रिपोर्ट आ गई, लेकिन सिफारिशें लागू नहीं हुई। इस प्रकार से पिछले दो-तीन सालों से पंप संचालकों का कमीशन बढ़ाने की मांग पूरी नहीं की गई। अब मामला हाई कोर्ट में है, जहां इससे संबंधित सभी याचिकाओं की सुनवाई होना है।sudheer 2

सवाल : लोकल एडमिनिस्टे्रश से क्या तकलीफें हैं?
जवाब : वैसे तो हमारी मुख्य मांग कमीशन बढ़ाने को लेकर है, लेकिन स्थानीय प्रशासन भी कभी-कभी ऐसे फतवे जारी कर देता है, जो डीलरों पर जबरन थोपे जाते हैं। जैसे पिछले दिनों स्थानीय प्रशासन द्वारा पंप संचालकों को कहा गया कि बगैर हेलमेट के यदि वाहन चालक पेट्रोल लेने आए तो उन्हें पेट्रोल नहीं दें जबकि नियमानुसार यदि हमारे पास पेट्रोल है, तो हम किसी को पेट्रोल देने के लिए मना नहीं कर सकते हैं। वाहन चालक हेलमेट पहने, यह देखने का काम ट्रैफिक पुलिस का है।

सवाल : यदि पेट्रोल पंप संचालकों को घाटा हो रहा है तो कितने पेट्रोल पंप बंद हो गए।
जवाब : देश में साठ हजार पेट्रोल पंप है, एक पेट्रोल पंप पर औसत 15  कर्मचारी होते हैं। पेट्रोल पंप पर कभी छुट्टी नहीं होती है। इसके अलावा कमीशन नहीं बढऩे और पेट्रोल के दाम बढऩे से हमारी लागत बढ़ रही है। उदाहरण के लिए पहले सात लाख में एक टैंकर आ जाता था, अब नौ लाख रुपए में आ रहा है। कार्यशील पूंजी बढऩे से ब्याज ज्यादा लग रहा है। पेट्रोल महंगा होने से ऑपरेटिंग कास्ट भी बढ़ गई है, इवाप्रेशन भी नेचरल है, पहले इस पर 70   रुपए प्रति लीटर नुकसान होता था, अब अस्सी रुपए नुकसान होता है। कुल मिलाकर ऑपेरिंग कास्ट बढऩे से हमारा मार्जिन बहुत ही कम रह गया है।

सवाल : आपका जन्म कब हुआ और आप किन संस्थाओं से जुड़े हैं?
जवाब : मेरा जन्म 13  अगस्त 1946 को  इंदौर में हुआ। मेरे पूर्वज इंदौर के मराठा शासन में पंद्रह वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे। मेरी शिक्षा इंदौर में हुई, जीएसआईटीएस से इंजीनियरिंग की। मैं फेडरेशन ऑफ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएसन का जनरल सेक्रेटरी, डीएवीवी की एडवाइजरी कमेटी का मेंबर एवं बाल विनय मंदिर फाइंडर चेयरमैन रहा। इसके अलावा जायंट्स ग्रुप ऑफ इंदौर का प्रेसीडेंट, नगर सुरक्षा समिति के सदस्य  सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़ा हूं।

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