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अम्बानी की रिलायंस को पेंशन फंड के 90 हजार करोड़ दे दिए | Pension Funds gives 90 thousand crores to Ambani’s Reliance

Posted on: 22 Apr 2019 18:18 by Surbhi Bhawsar
अम्बानी की रिलायंस को पेंशन फंड के 90 हजार करोड़ दे दिए | Pension Funds gives 90 thousand crores to Ambani’s Reliance

स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस निप्पोन लाइफ सेट मैनेजमेंट कोयला कर्मियों के पेंशन फंड के वित्तीय प्रबंधन के लिए 90 हजार करोड़ रुपये सौंपे जाने पर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार ने यह रकम आम चुनाव की आचार संहिता के बीच रिलायंस को सौंपी है ।नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन ने राफेल से भी बड़ा घोटाला करार दिया है। केंद्र पर आरोप लग रहे हैं कि अनिल अंबानी को दिवालिया होने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है जबकि इसका विरोध भी हुआ है।

यहां बताना होगा कि कोयला खदान भविष्य निधि संगठन का संचालन ट्रस्ट के जरिए किया जा रहा है। इसके जरिए कोल इंडिया और इसी अनुषांगिक कंपनियों से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को मासिक पेंशन का वितरण किया जाता रहा है। सीएमपीएफओ की 90 हजार करोड रुपए की रकम भारतीय स्टेट बैंक में जमा थी। इससे मिलने वाले 300 करोड़ रुपए से अधिक के ब्याज से पेंशन का वितरण हो रहा था। जानकारी के अनुसार 26 मार्च को कोल मंत्रालय द्वारा ट्रस्ट की बैठक आयोजित कर 90 हजार करोड रुपए रिलायंस निप्पोन लाइफ एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड को वित्त प्रबंधन के लिए जाने का प्रस्ताव लाया गया। ट्रस्ट के सदस्यों से सहमति लेकर इस पर निर्णय लिया गया। श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी भी इस ट्रस्ट के सदस्य हैं।

हालांकि श्रमिक नेता इसका विरोध कर रहे हैं। निजी कंपनी रिलायंस को 90 हजार करोड रूपये सौंपे जाने के खिलाफ नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन खुलकर सामने आया है। डीएचएल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दीपक जायसवाल ने कोल सचिव को पत्र लिखकर इस निर्णय की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। डॉक्टर जायसवाल का कहना है कि पेंशन फंड के पैसों कि वित्त प्रबंधन के लिए निजी कंपनी को सौंपा जाना उचित नहीं है वह भी बगैर किसी गारंटी के। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला कोयला कर्मियों की खून पसीने की कमाई को खतरे में डालने वाला है। इसकी जांच सीबीआई और कैद से कराई जानी चाहिए।

श्रमिक संगठन कर रहे विरोध

निजी कंपनी को पेंशन फंड का वित्तीय प्रबंधन सौंपे जाने को लेकर कोयला उद्योग के श्रमिक संगठन विरोध जरूर कर रहे हैं, जबकि ट्रस्ट के सदस्य के तौर पर श्रमिक नेताओं ने इस फैसले पर सहमति जताई थी।

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