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पटेल की 3000 करोड़ की मूर्ति से ब्रिटेन में भारत की आलोचना के मायने, नीरज राठौर की कलम से

Posted on: 05 Nov 2018 15:48 by Ravindra Singh Rana
पटेल की 3000 करोड़ की मूर्ति से ब्रिटेन में भारत की आलोचना के मायने, नीरज राठौर की कलम से

ब्रिटेन में अब ये बहस छिड़ गई है कि जिस भारत को ब्रिटेन ने हाल के वर्षों में 1.1 अरब पाउंड की खैरात दी है, उस भारत देश ने इतनी बड़ी रकम एक मूर्ति पर क्यों खर्च कर दी. इस मूर्ति का निर्माण शुरू होने और काम जारी रहने के दौरान ब्रिटेन भारत को मानवीय सहायता करता रहा था. अब वह रकम काफी कम हो चुकी है. ब्रिटेन के अखबारों में चल रही बहस को इस न्यूज़ लिंक में देखा जा सकता है :-
https://www.dailymail.co.uk/news/article-6348295/Thats-rich-gave-1billion-aid-India-built-330million-statue.html?ito=facebook_share_fbia-top&fbclid=IwAR3ZpZektkkFGwZgtBUeKoYqKwS-RepAxt6SYcZG6gXC5-v8Gq8BgJHKXnc
वहा के अखबारों की इस रिपोर्ट से यह मालूम होता है कि ब्रिटेन हमें चिढ़ा रहा है कि हमने तुम्हें गरीब जानकर 1 अरब पाउंड दिए तो उसकी आधी रकम तुम लोगों ने एक मूर्ति बनाने मे उड़ा दी है. 3000 करोड़ रुपया एक मूर्ति में फूंकने वाला देश भारत आज भी विकसित देशो से एवं अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से आर्थिक सहायता मांगता है.

मेरी राय है कि भारत को ब्रिटेन से अब कोई और सहायता नहीं लेनी चाहिए. हम चद्रयान भेज सकते हैं. राहत लेने वाले देश बने रहना कोई अच्छी बात नहीं है. कुछ लोग हमारे यहां भूख से मर रहे हैं, तो इसे कोई बड़ी समस्या नहीं माना जाना चाहिए.
आज ब्रिटेन ने 3000 करोड़ रूपये की बर्बादी पर भारत की आलोचना की है कल से ब्रिटेन के लोग, हमारे देश के चोर पंडित विजय माल्या जो की भारत का 9,000 करोड़ रुपए लेकर भागा है, उस पर भी भारत की आलोचना करके भारत की आर्थिक सहायता रोक सकते है. 9,000 करोड़ रुपए का मतलब लगभग 1 अरब पौंड ही होता है. और इत्तेफाक की बात है की ब्रिटेन ने भारत को 1.1 अरब पौंड ( 9000 करोड़ रुपया ) की सहायता दी और इतना ही पैसा पं विजय माल्या लेकर ब्रिटेन भागे. यदि ऐसी घटनाये होती रही तो भारत की मुश्किलें और बढेगी.

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