Breaking News

परहित कामना से होती है परमात्मा की असीम कृपा

Posted on: 18 Jun 2018 06:38 by shilpa
परहित कामना से होती है परमात्मा की असीम कृपा

नई दिल्ली : जो परहित की कामना करता है,या असहायों की सहायता करता है उस पर परमांत्मा की असीम कृपा होती है। जो दयालु, करुणाकरी होते है ईश्वर उसका स्वीकार करते है आज जो कथा हम देख रहे है वो शिवपुराण में उल्लेखित है।

भगवान शिव को पति रूप में पाने हेतु माता पार्वती कठोर तपस्या कर रह थी। और उनकी तपस्या पूर्णतः की ओर थी। ऐसे ही एक बार जब वह भगवान के चिंतन में ध्यान मग्न बैठी थी , उसी समय उन्हें एक बालक की चीख सुनाई दी जैसे वो डूब रहा हो। माता तुरंत उठकर वह पहुंची तो उन्होंने देखा एक मगरमच्छ बालक को पानी के अंदर खींच रहा था।

मगरमच्छ उस बालक को खाने की कोशिश कर रहा और उसे पानी के अंदर खिंच रहा था और दूसरी और बालक अपनी जान बचाने के लिए प्रयास कर रहा था। करुणामयी पार्वती माँ को बालक पे दया आ गयी। उन्होंने मगरमच्छ से निवेदन किया की बालक को छोड़ दीजिये इसे आहार न बनाए। मगरमच्छ बोला माता यह मेरा आहार है मुझे हर छठे दिन उदर पूर्ति हेतु जो पहले मिलता है, उसे मेरा आहार ब्रह्मा ने निश्चित किया है। माता ने फिर कहा आप इसे छोड़ दे इसके बदले मैं अपनी तपस्या का फल दुंगी। मगरमच्छ ने कहा ठीक है। माता ने उसी समय संकल्प कर अपनी पूरी तपस्या का पुण्य फल उस मगरमच्छ को दे दिया।

माता पार्वती के तपस्या के फल को प्राप्त कर मगरमच्छ सूर्य की भांति चमक उठा। उसकी बुध्द्धि तेज हो गयी। उसकी भावनाये शुद्धः हो गयी। उसने कहाँ माता आप अपना पुण्य वापस ले लें। मैं इस बालक को यु ही छोड़ दूंगा। माता ने मना कर दिया तथा बालक को गोद में लेकर ममतामयी माता दुलारने लगी। बालक को सुरक्षित लौटाकर, माता ने अपने स्थान पर वापस आकर तप शुरु कर दिया।

भगवान शिव वहा प्रकट हो गए और माता से कहा “हर प्राणी में मेरा ही वास है, तुमने उस मगरमच्छ को तप का फल दिया वह मुझे ही प्राप्त हुआ। अब तुम्हें तप करने की आवश्यकता नहीं है।अत: तुम्हारा तप फल अनंत गुना हो गया। तुमने करुणावश द्रवित होकर किसी प्राणी की रक्षा की अत: मैं तुम पर प्रसन्न हूं तथा तुम्हें पत्नी रूप में स्वीकार करता हूं।

कथा का सारांश यही है , जो परहित की कामना करता है ,उसपर परमात्मा की असीम कृपा होती है।

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com