संसदीय समिति का खुलाासा: भारतीयों ने 12 साल में विदेश में जमा किया 34 लाख करोड़ का काला धन

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संसद में पेश की गई वित्तीय मामलों की रिपार्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल भारतीयों द्वारा 1998 से लेकर 2010 के बीच विदेश में अघोषित तौर पर करीब 34 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए थे।

इन सेक्टर्स ने जमा की सबसे ज्यादा संपत्ति

देश के तीन प्रतिष्ठित आर्थिक और वित्तीय शोध संस्थानों, राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी), राष्ट्रीय व्यावहारिक आर्थिक शोध परिषद (एनसीएईआर) और राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंध संस्थान (एनआईएफएम) के अध्ययनों के आधार पर रखी गयी रिपार्ट के अनुसार दस सेक्टरों की ओर से विदेशों में सबसे अधिक अघोषित संपत्ति जब्त की गई है।

वित्त पर स्थायी समिति की लोक सभा में प्रस्तुत इस रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों संस्थानों ने निष्कर्ष निकाला है कि अचल सम्पत्ति, खनन, औषधि, पान मसाला, गुटका, सिगरेट-तम्बाकू, सर्राफा, जिंस,फिल्म और शिक्षा के कारोबार में काली कमाई या अघोषित धन का लेन देन अपेक्षाकृत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘अभी तक सामने आए अनुमानों में इस उद्देश्य के लिए उपयोग की गई सर्वश्रेष्ठ मेथडोलॉजी या दृष्टिकोण को लेकर एकरूपता या सहमति नहीं है।’

28 मार्च को जमा की गई थी रिपोर्ट

एम वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने 17वीं लोकसभा से पहले ही 28 मार्च को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी थी। पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘ऐसा लगता है कि अघोषित आय और संपत्ति का विश्वसनीय अनुमान लगाना खासा मुश्किल काम है।
बता दे कि यूपीए 2 की सरकार के दौरान ब्लैक मनी को लेकर चल रहे विवाद के बीच तात्कालीन मनमोहन सरकार द्वारा इन तीनों संस्थाओं को देश और देश के बाहर भारतीयों के कालेधन का अध्ययनध्सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

यह निकला निष्कर्ष

रिपोर्ट के अनुसार एनसीएईआर ने अपने अध्ययन में बताया है कि भारत से 1980 से लेकर 2010 के बीच 26,88,000 लाख करोड़ रुपये से लेकर 34,30,000 करोड़ रुपये की ब्लैक मनी विदेश के बैंकों में जमा की गई थी। वहीं, एनआईएफएम का कहना है कि 1990-2008 में अर्थव्यवस्था में सुधार के दौरान लगभग 15,15,300 करोड़ रुपये (216.48 अरब डॉलर) का काला धन भारत से विदेश में जमा किया गया था। एनआईपीएफपी के अनुसार, 1997-2009 के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.2 फीसदी से लेकर 7.4 फीसदी तक काला धन विदेशों की बैंक में जमा किया गया था।

समिति ने कम समय होने का हवाला देते हुए कहा कि वह इस विषय के संबिधत पक्षों से पूछताछ की कार्रवाई में सीमित लोगों से ही चर्चा कर पाई है। समिती ने कहा कि इस संदर्भ में गैर सरकारी गवाहों और विशेषज्ञों से भी चर्चा की जाएगी। जिसके चलते इस रिपोर्ट को को प्राथमिक रिपोर्ट के रूप में लिया जा सकता है।

वहीं समिति ने वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग से अपेक्षा की है कि उसके द्वारा ब्लैक मनी का पता लगाने के लिए और अधिक शक्ति से प्रयास किए जाएंगे। वहीं समिति ने कहा कि वह यह भी अपेद्वाा करती है कि विभाग एवं इन तीनों अध्ययनों और कालेधन के मुद्दे पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से प्रस्तुत की गई सातो रिपोर्टाें पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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