पकौड़ेश्वर की किरपा | Pakodeshwar’s Mercy

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vyang

आलोक पुराणिक

एक समय की बात है, एक बेसन कारोबारी था। उसके तीन बेटे थे-एक बेटा बहुत होशियार था, वह आईआईटी, आईआईएम से पढ़कर एमबीए हो गया और फिर आईएएस हो गया।

एक बहुत ही लफंडर टाइप था, सो स्वाभाविक तौर पर वह नेता बनकर मंत्री बन गया।

एक बेटा बहुत मस्त मौला था कुछ करता धरता नहीं था, एक दिन बाप ने उसे ताना दिया-काबिल बच्चा हो तो इस बेसन की बोरी से भी दुनिया को कब्जा करने का इंतजाम कर सकता है।

वह बेटा इस बात को दिल पर ले गया। उसने बोरी से बेसन निकाला और पकौड़े बनवाये-उन्हे नाम दिया इथनिक पकौड़े। इथनिक का बड़ा जलवा था उन दिनों, किसी भी आइटम पर इथनिक चेप दो, वह चल निकलता था। तीसरे बेटे ने पकौड़ों का ठेला वहां लगाया, जहां तमाम टीवी चैनल थे। टीवी चैनल के पत्रकार वहां पकौड़े खाकर खबरें छानते थे। कुछ तो यह तक कहते थे-हम भी क्या कर रहे हैं आखिर में पकौड़े ही छान रहे हैं। पुरानी सूचनाओँ के बासे तेल में छाने जा रहे हैं-बगदादी की खबरों के पकौड़े, हनीप्रीत की खबरों के पकौड़े। इस तरह से पकौड़ी और खबरों का कारोबार खूब फलता फूलता गया।

एक टीवी पत्रकार ने एक दिन पकौड़ेवाले से उसकी कमाई पूछी , तो टीवी पत्रकार हिल गया। टीवी पत्रकार जितने साल में कमाता था, उतने तो पकौड़ेवाला महीने में कमाता था। टीवी पत्रकार ने कालोबोरेशन किया पकौड़ेवाले से और पूरा खेल समझाया।

कुछ दिनों में पकौड़ेश्वर बाबा के पोस्टर लग लिये पूरे शहर में। पकौड़ेश्वर बाबा हर समस्या का हल बताने लगे कि फलां खास पकौड़ेवाले के पकौड़े हरी चटनी के साथ खाये जायें तो प्राबलम साल्व हो जायेगी।

फिर तो पकौड़ेश्वर बाबा टीवी पर आ लिये , फिर पकौड़ों का ठेला राष्ट्रीय हो लिया। धुआंधार चल निकला। इतना चल निकला कि जोमिन्नो पिज्जावाले भी घबरा गये कि हम भी पिज्जेश्वर बाबा टाइप कुछ खेल करें और पिज्जा को प्रसाद बनवा दें। फिर जोमिनो पिज्जावालों को बताया गया-ऐसा न करें माना कि आप भी पकौड़ा टाइप आइटमों के बहुराष्ट्रीय ब्रांड हैं,पर आपका बहुराष्ट्रीय होना आपके हक में नहीं जायेगा, भावनाएं आहत हो जायेंगी यहां। फिर आपको आफत हो जायेगी। ठगी में भारतीय लोकल लोगों को बरदाश्त कर लेते हैं पर विदेशियों को ठगी के अवसरों में उतनी समानता नहीं है। सो बिना बाबा की किरपा के ही बेचते रहिये।

पकौड़ेश्वर बाबा के प्रताप से इथनिक पकौड़े ऐसे चले, ऐसे चले कि धुआं मच गया।

इथनिक पकौड़ेवाले ने अपने आईएएस भाई से पूछा-बता ईमानदारी से तू कितना कमा पाता है।

आईएएस ने जो सेलरी बताया-उसे सुनकर इथनिक पकौड़ेवाले ने कहा-तू मेरी पकौड़ा कंपनी का सीईओ बन जा, उससे ज्यादा तू यहां कमा लेगा।

आईएएस नौकरी में परेशान था, क्योंकि उसका मंत्री हर महीने से उससे बहुत मोटी रकम की मांग करता था। वह ईमानदार टाइप आईएएस था, बेईमानी सिर्फ अपने लिए करता था, मंत्री के लिए क्यों करनी।

तो आईएएस पकौड़ा कंपनी का सीईओ बन लिया।

फिर पकौड़ा कंपनी की कमाई बहुत बढ़ गयी तो इथनिक पकौड़े के मंत्री भाई ने कहा-भाई कुछ चंदा चिट्टा इधऱ भी दिया कर, तो पकौड़े को राष्ट्रीय खाद्य बनाने की दिशा में कुछ कैंपेन चलायें।

कुछ समय बाद इथनिक पकौड़ा कंपनी के मालिक का अपने परिवार में, अपने समाज में विकट जलवा हो गया। रामलीला के लिए चंदे से लेकर, सन्नी लियोनी नाइट तक के लिए पकौड़ा कंपनी से चंदा जाने लगा। इस तरह से पकौड़ा कारोबारी चतुर्दिक लोकप्रिय हुआ और उसके आईएएस भाई और मंत्री भाई हाथ बांधकर उसकी दरबानी टाइप करने लगे।

शिक्षा-इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पकौड़े से पूरा साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है।

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