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रेखाजी के कृतित्व व व्यक्तित्व पर अपनी बात रखी: पद्मा राजेंद्र

Posted on: 03 May 2019 18:33 by Surbhi Bhawsar
रेखाजी के कृतित्व व व्यक्तित्व पर अपनी बात रखी: पद्मा राजेंद्र

जब किसी मंच पर राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन साहब व कुशल वक्ता,चिंतक व विचारक डॉ विकास दवे हो वही उनके साथ मुझे भी बैठना है तो यह मेरे लिये गर्व की बात है, पर उन जैसे औजस्वी व ज्ञानियों के सामने जब मुझे बोलना भी है तो यह थोड़ा मुश्किल भी था….पर जब ऑडियंस में से किसी ने मेरे बोलने के बाद वही से जोर से बोला कि आप बहुत अच्छा बोली तो राहत भी हुई व हिम्मत भी मिली। बोलने के दौरान तालियां भी बजी थी पहले,लोगों ने तारीफें भी की थी कार्यक्रम के बाद,पर पहली बार श्रोताओं में से आवाज आई। आवाज भी उनकी जिन्हें मैं व्यक्तिगत रूप से जानती भी नहीं थी।

सत्तन साहब व विकासजी के साथ मंच तो पहले भी कई बार साझा किया है पर कल तो मुझे रेखाजी के कृतित्व व व्यक्तित्व पर अपनी बात रखनी थी उन दोनों विद्वान वक्ताओं के सामने।

अपने चौथे उपन्यास में रेखाजी ने ‘आम्रपाली’ जो कि वैशाली की नगर वधु के पद पर आसीन कर दी गई एक सर्वांग सुंदरी ऐश्वर्य,प्रसिद्धि ओर सम्रद्धि के उच्चतम शिखर पर आसीन थी का मनोवैज्ञानिकअंतर्द्वंद को आत्मकथात्मक शैली में उकेरा है।

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