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नंबर वन का हमारा मुक़ाबला हम से ही था, कीर्ति राणा की टिप्पणी

Posted on: 17 May 2018 10:17 by Ravindra Singh Rana
नंबर वन का हमारा मुक़ाबला हम से ही था, कीर्ति राणा की टिप्पणी

हम फिर से स्वच्छता में सारे देश में नंबर वन घोषित हुए हैं तो यह नगर निगम के सोलह हजार अधिकारी, कर्मचारियों की रात-दिन की सतत मेहनत का सुफ़ल तो है ही, हम सब रहवासियों द्वारा पालन किए जाने वाले स्व अनुशासन का नतीजा भी है। या यूँ कहें कि हमारा मुक़ाबला चंडीगढ़, भोपाल या किसी अन्य शहर से नहीं खुद अपने से ही था।

पिछले साल नंबर वन का ख़िताब मिलने के बाद हम आनंदोत्सव में डूबे नहीं रहे बल्कि खुशियां मनाने के बाद फिर सजग हो गए कि आसपास कहीं कूड़े कचरे के ढेर ना लग जाएँ। पिछली दीवाली पर आतिशबाजी के जश्न की दूसरी सुबह शहर की सड़कें साफसुथरी मिलीं तो यह निगम अमले, महापौर मालिनी गौड़, तत्कालीन आयुक्त मनीष सिंह की सजगता ही थी, यही क्रम रंगपंचमी पर भी जारी रहा।

शहर में चले स्वच्छता अभियान और स्मार्ट सिटी के तहत प्रभावी लोगों के मकान ध्वस्त किए जाने के बाद मनीष सिंह को अन्य किसी विभाग में भेजने की सजा का पूरा प्लान तैयार हो गया था, आयुक्त नगरीय प्रशासन विवेक अग्रवाल ढाल की तरह नहीं अड़े होते, महापौर मालिनी गौड़ का पोलिटिकल सपोर्ट नहीं होता तो इंदौर की ख़ूबसूरती देखने अन्य राज्यों, विदेशों से प्रतिनिधिमंडल भी शायद ही आतेऔर फिर से नंबर वन होने का यह गौरव शायद नहीं मिल पाता।

मुख्यमंत्री चौहान को भी बधाई कि नगरनिगम से लेकर नगरीय प्रशासन विभाग तक तैनात अधिकारियों को फ्रीहैंड देकर उनकी कार्यनिष्ठा पर भरोसा किया और इंदौर विकास से जुड़े मामलों में कोई भी निर्णय लेने से पहले महापौर मालिनी गौड़ की इच्छा का सम्मान किया।इंदौर लगातार दो बार नंबर वन रहा, शहर के विकास से जुड़ी योजनाओं में केंद्रीय मंत्रियों का जो सहयोगात्मक रुख़ है उसकी वजह हमारी ताई का लोकसभा अध्यक्ष होना भी है। तमाम मतभेद-मनभेद के प्रसंगों को भुलाकर सुमित्रा महाजन ने शहर विकास को जिस तरह प्राथमिकता दी है वही वजह है कि सबसे स्वच्छ अपना इंदौर विश्वपटल पर उड़ान भर रहा है।

हम अपनी मेहनत, विश्वास और सहयोग से फिर से नंबर वन हो गए। यह अनुसंधान करने वाले संस्थानों के लिए शोध का विषय भी हो सकता है कि सबसे सुनियोजित बसाहट और साफ़ कहे जाने वाले चंडीगढ़ सहित देश के विभिन्न शहर जब एक नंबर पर आने की दौड़ में जी जान से जुटे हों तब वही इंदौर फिर से नंबर वन का ख़िताब कैसे जीत गया।

शोध जब होगा तो यह भी देखा जाएगा कि प्रदेश की राजधानी का ख़िताब प्राप्त शहर इस बार भी नंबर दो पर ही रहा। सामान्य सी समझ रखने वाला भी इस बार मिले ख़िताब पर यही कह सकता है कि इंदौर फिर से इस मेहनत में जुटा रहा कि उससे एक नंबर का ख़िताब छिन ना जाए और पायदान नंबर दो पर रहे भोपाल ने पूरे साल यह हिम्मत और जज़्बा दिखाने की कोशिश ही नहीं की कि एक नंबर की पायदान के लिए कैसे कदम बढ़ाएँ। अब समझा जा सकता है कि मुख्यमंत्री चौहान क्यों इंदौर को अपने सपनों का शहर कहते हैं।

नवागत निगमायुक्त के लिए पहले ही लिख दिया था कि आशीष सिंह के लिए बिछा है उपलब्धियों का रेड कारपेट।आशीष सिंह ने इस उपलब्धि को इंदौरवासियों का सहयोग बताने के साथ महापौर मालिनी गौड़ और मनीष सिंह की उपलब्धि बताया है तो सही ही कहा है। उनका यह कहना ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि इस ख़िताब को तीसरी बार भी क़ायम रखने के लिए हम दुगने उत्साह से काम करेंगे। आइए, हम सब एक दूसरे को बधाई दें कि हमारा ख़िताब हमारे पास रहा और कामना करें कि नंबर वन की हेट्रिक भी बनाएँ।

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