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51 शक्तिपीठों 51 अखाड़ों के संगठन बनाए गए

Posted on: 03 Feb 2019 17:07 by Ravindra Singh Rana
51 शक्तिपीठों 51 अखाड़ों के संगठन बनाए गए

अखाड़ों के संगठनात्मक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए महंत लालपुरी ने लिखा है कि अखाड़ों के महंत और मंडलेश्वरों ने ५१ शक्तिपीठों को आधार मानकर देश के विभिन्न भागों में ५१ केंद्र बनाए। उस समय की लोकभाषा में शक्तिपीठों की देवी की मढि़ कहने का प्रचलन था। कई जगह आज भी स्थानीय भाषा में देवी मंदिर को मढि़ ही कहा जाता है।

अखाड़ों के अंतर्गत मढिय़ों में पर्वत सागर और सरस्वती की कोई मढि़ नहीं है। बाकी सभी संन्यासी मढि़ के अंतर्गत है। इनके अलावा एक बावनवीं मढि़ भी है, जो लामा मढि़ के नाम से प्रसिद्ध है। सत्ताइस मढिय़ां ‘गिरि’ पद धारण करने वालों, १६ पुरी पदधारियों और चार-चार भारती व वन पदधारियों के नाम से प्रसिद्ध है।

मढिय़ों वन जाने के बाद अखाड़ों के काम और दायित्व का विस्तार करने के लिए नगरों और गांवों में भी केंद्र बनाए गए। इनहें मठ, दावे और धूनि कहा जाता था। मठ के संन्यासी खेती बाड़ी कर गुजारा चलाते। वे कहीं भिक्षाटन के लिए नहीं जाते, लोग सहज भाव से मठ में आकर कुछ दे जाते तो उसका स्वागत था वरना कोई संन्यासी किसी से कुछ मांगते नहीं थे। दावे और धूनि कुछ छोटे केंद्र थे। इनमें गिने-चुने संन्यासी ही रहा करते थे। बाद में संगठन लडख़ड़ाया और कहीं किसी मठ का कोई संन्यासी महंत उपलब्ध नहीं हुआ तो उस जगह गृहस्थ महंत की ही नियुक्ति की जाती।

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