धर्म को लेकर नुसरत और जायरा के दो नजरिए, किसका ईमान सही मानें?

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nusrat jahan

अजय बोकिल

दोनों युवा अभिनेत्रियां। दोनो मुस्लिम। दोनों की धर्म की अपनी-अपनी परिभाषा। एक धार्मिक समन्वय की पक्षधर तो दूसरी का धर्म के लिए चकाचौंध की दुनिया से अचानक वैराग्य। एक अभिनय से राजनीति में तो दूसरी अभिनय से धर्मनीति की ओर। दोनों अपने अपने ढंग से ट्रोलिंग का शिकार। एक हिंदू पहनावे के लिए तो दूसरी बिना किसी ठोस कारण के ईमान (धर्म) की ओर जाने के लिए।

ये दोनो घटनाएं बेहद दिलचस्प और कुछ सोचने के लिए विवश करती हैं। पहले मामला लोकसभा की नवनिर्वाचित सांसद और बंगाली फिल्म अभिनेत्री नुसरत जहां जैन का। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के ‍टिकट पर इस बार कई अभिनेत्रियां और कलाकार चुनाव जीत कर आए हैं। ऐसे में युवा और सुदर्शन अभिनेत्री नुसरत जहां का बशीरहाट लोकसभा सीट से जीत कर आना अनहोनी नहीं थी।

29 वर्षीय नुसरत चुनाव से ज्यादा चुनाव बाद चर्चा में इसलिए आईं कि उन्होंने अपने ब्वाॅय फ्रेंड निखिल जैन से तुर्की में शादी रचा ली। उन्होंने संसद में शपथ भी हिंदू नववधु के वेश में ली। उनके माथे पर बिंदी, गले में मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर भरा था। शपथ ग्रहण के बाद नुसरत ने स्पीकर की आसंदी को न केवल प्रणाम किया बल्कि उनसे आशीर्वाद की अपेक्षा में पैर भी छुए। कट्टर इस्लाम समर्थकों की निगाह में यह ‘घोर गैर इस्लामिक कृत्य’ था तो हिंदू/जैनों के लिए नुसरत का यह व्यवहार कौतुहल से भरा था। खास बात यह कि नुसरत ने यह सब बिना किसी हिचक अथवा असमंजस के किया।

इससे छिपा संदेश यह गया कि विवाह के बाद नुसरत ने धर्म बदल लिया है। ऐसे में बगैर सच को जानें फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने फरमाया कि नुसरत जहां की जैन व्यापारी के साथ शादी इस्लाम के अनुसार मान्य नहीं है। इसके पहले नुसरत के खिलाफ फतवा भी जारी हुआ था कि उनकी शादी गैर इस्लामिक है। इमाम ने मीडिया से कहा कि नुसरत ने गैर इस्लामिक व्यक्ति से शादी कर के बड़ा अपराध किया है। मुस्लिम एक मुस्लिम से ही शादी कर सकते हैं। इस प्रतिक्रिया और फतवे का करारा जवाब नुसरत ने ही दिया। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि मैं समावेशी भारत का प्रतिनिधित्व करती हूं, जो जाति, पंथ और धर्म की बाधाओं से परे है।’ नुसरत ने यह भी कहा कि मैं अब भी मुस्लिम हूं और सभी धमों का सम्मान करती हूं।

किसी को इस बात पर कमेंट नहीं करना चाहिए कि मैं क्या पहनूंगी। श्रद्धा, पहनावे से परे है और सभी धर्मों के अमूल्य सिद्धांतों पर विश्वास करने और अभ्यास करने के बारे में अधिक है। नुसरत के समर्थन में भाजपा नेत्री शाजिया इल्मी आगे आई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी मर्जी से कपड़े पहनने और पसंदीदा धार्मिक अनुष्ठान पालन करने का हक है। साध्वी प्राची ने इससे भी एक कदम आगे जाकर बयान दिया कि नुसरत हमारे समुदाय में आई क्योंकि वह समझती है कि हिंदू धर्म महिलाओं का सम्मान करता है।

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