आबोहवा के लिए साइकल पर न्यूड रैली

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लंदन से परीक्षित यादव

नई दिल्ली: भारत में किसी बात का विरोध करना हो तो सड़कें रोकी जाती है, गाड़ियां जलाई जाती है,पटरी उखाडी जाती है और हर वह हरकत की जाती है जिससे जिम्मेदारों का ध्यान खींचा जा सके। यह परवाह भी नहीं होती कि बेगुनाहों का नुकसान हो रहा है। इंग्लैंड में विरोध का तरीका अनूठा है। यहां सरकार और पुलिस डंडे फटकारने की बजाय हिफाजत देती है।

कल लंदन के कलेपहम स्ट्रीट से निकली न्यूड रैली इसी की बानगी थी। 18 किलोमीटर के सफर में 14 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। अमीर ,गरीब ,बूढ़ा ,बच्चा, जवान लड़का, लडक़ी सभी बिना कपड़ों के साइकिल पर निकले। सबसे ज्यादा ध्यान वर्जिन मीडिया के मालिक रिचर्ड ब्रेनसोन की तरफ था। वह भी रैली में शामिल हुए। उनके जैसे दर्जनों अमीर इस रैली का हिस्सा थे।

गुस्सा इस बात से था कि कार का चलन क्यों बढ़ रहा है। आबोहवा को क्यों नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जानवरों को क्यों परेशान किया जाता है। ऐसे कई संदेश रैली वालों ने बदन पर गुदवा रखे थे। ढोल धमाके के साथ रैली निकलती है। किसी के पास गिटार था, तो किसी ने स्पीकर पर गाने बजा रखे थे। हिफाजत के लिए सारे इलाके की पुलिस लगाई गई थी। ट्रैफिक को भी एडजस्ट किया जाता है। रैली का नाम ‘ साइकल एंड सेफ्टी अगेंस्ट कार’ था। रैली में छह पड़ाव रखे गए थे।

शामिल होने को लेकर कोई नियम नहीं था। जहां से चाहो शामिल हो सकते हैं, जहां तक जाना चाहो वही तक जा सकते हैं। यह भी जरूरी नहीं कि पूरे-पूरे कपड़े उतारना हो। कई लोग इसलिए भी शामिल हुए कि उन्हें कुछ अलग करना था। पिछले साल इस रैली में कई भारतीय भी थे, लेकिन इस बार कोई नजर नहीं आया । लंदन ,ब्रिस्टल southampton सहित इंग्लैंड के कई इलाकों में रैली निकाली गई थी लेकिन सबसे ज्यादा लोग लंदन में ही शामिल हुए। देखने वालों हजारो की तादाद में थे। सोशल मीडिया पर 42 लाख लोगों ने इसे देखा है। 50 साल से इस तरह की रैली निकाली जा रही है।

जून और जुलाई का वक्त ही तय किया जाता है क्योंकि इस समय यहां मौसम अच्छा होता है। अगर मौसम बिगड़ भी जाए तो परवाह नहीं। अंग्रेजों के इस देश में बारिश और ठंड का ठिकाना नहीं है। कब शुरू हो जाए अंदाजा लगाना मुश्किल है। इंग्लैंड के एनजीओ और दूसरे सामाजिक संगठनों की अगुवाई में रैली निकली थी। सोशल मीडिया, अखबार और रेडियो के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचा दिया जाता है। रजिस्ट्रेशन के लिए नाम देना होता है ।और यह भी बताना होता है कि आप आबोहवा को लेकर क्या सोचते हैं।

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