अब राफेल में हुए भ्रष्टाचार का केस बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर हो गया है | Now the Corruption Case in RAFALE has become Crystal Clear

0
34
rafale jet

वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मालवीय

आज सुबह हुए ताजा खुलासे में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया कि अनिल अंबानी ओर फ्रेंच सरकार के बीच किस तरह का लेनदेन हुआ अब हमें यह मानना ही होगा कि ‘चौकीदार बहुत बड़का वाला चोर हैं’।

सुबह फ्रांस की मैगजीन Le Monde ने रॉफेल मामले में अनिल अंबानी ओर तत्कालीन फ्रेंच सरकार की कलई खोल दी। हम जानते है कि अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस कम्पनी अप्रैल 2015 में पीएम मोदी द्वारा घोषित फ्रांस के साथ भारत के राफेल जेट सौदे में एक ऑफसेट साझेदार है।

लेकिन आज से पहले हम यह नही जानते थे कि अनिल अंबानी की फ्रांस में पहले से एक रजिस्टर्ड कंपनी है, जिसे ‘रिलायंस अटलांटिक फ्लैग फ्रांस’ कहा जाता है। इस कंपनी की फ्रेंच टैक्स अधिकारियों द्वारा जांच की गई और 2007 से 2010 की अवधि के लिए करों में 60 मिलियन यूरो का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी पाया गया।

लेकिन अम्बानी तो अम्बानी ठहरे उन्होंने फ्रांस सरकार से मात्र 7.6 मिलियन यूरो में मामला निपटाने की पेशकश की।

अब फ़्रांस के राष्ट्रपति तो मोदी जी थे नही तो, फ्रांसीसी कर अधिकारियों ने इस ऑफर को रिफ्यूज कर दिया। उन्होंने एक और जांच की ओर 2010 से 2012 तक की अवधि के लिए पिछले करों के अतिरिक्त 91 मिलियन यूरो की मांग करने लगे।

यह मामला थोड़ा लंबा खिंच गया और इधर भारत मे मोदी सत्ता में आ गए और उन्होंने UPA के समय हुई फ्रांस की डसाल्ट कम्पनी के साथ हुई रॉफेल डील को निरस्त कर दिया जिसमें 126 विमान को 590 करोड़ प्रति विमान की कीमत से खरीदा जाना था।

मोदी ने डसाल्ट के बजाए फ़्रांस सरकार से रॉफेल को खरीदने की पेशकश की अब सिर्फ 36 विमान खरीदने की बात की गयी लेकिन लगभग तिगुनी कीमत यानी 1690 करोड़ देने की पेशकश की गई। इस डील के सामने आने से पहले अनिल अंबानी मार्च 2015 के अंत में पेरिस में फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां-यवेस लेस ड्रियन के कार्यालय में देखे गए ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 36 राफेल विमानों की खरीद का ऐलान किया।

फ़्रांस के लिहाज से यह सौदा हर हाल में अच्छा था जाहिर था कि तिगुनी कीमत के दिये जाने के पीछे बहुत बड़े निगोशिएशन किए गए थे। पिछले दिनों यह भी सामने आया था कि राफेल डील पर मुहर लगने से पहले अंबानी की रिलायंस एंटरटेनमेंट ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की सहयोगी जुली गायेट के साथ एक फिल्म निर्माण के लिए समझौता किया था।

लेकिन आज हमें पता चला है कि अम्बानी की कम्पनी ‘रिलायंस अटलांटिक फ्लैग फ्रांस’ को प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद बहुत बड़ी टैक्स छूट मिली। इस नयी राफेल डील के 6 महीने बाद फ्रांस की अथॉरिटीज ने अनिल अंबानी का 143.7 मिलियन यूरो यानी 1,124 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का टैक्स माफ कर दिया।

आपको याद होगा राफेल डील को लेकर फ्रांस के तब के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने बड़ा ख़ुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि अनिल अंबानी के रिलायंस का नाम उन्हें भारत सरकार ने सुझाया था। उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। एक फ़्रेंच अखबार मीडिया पार्ट को दिए इंटरव्यू में ओलांद ने कहा था कि भारत सरकार के नाम सुझाने के बाद ही दसॉल्ट एविएशन ने अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस से बात शुरू की थी।

तब भी बहुत हंगामा मचा था लेकिन भारत का मीडिया में इस खबर को भी दबा दिया गया लेकिन फ्रांस में कोई मोदी तो है नही। न ही उसके यहाँ हमारे यहाँ पाए जाने वाले जॉम्बी जैसे अन्धभक्त हैं ।

वहाँ भ्रष्टाचार विरोधी एनजीओ शेरपा ने पिछले साल ही अक्टूबर में राफेल सौदे में हुए संदिग्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करने का अनुरोध करते हुए फ्रांस के राष्ट्रीय वित्तीय कार्यालय से शिकायत दर्ज कराई थी जिसकी रिपोर्ट आज मीडिया में सामने आई हैं जिससे यह अम्बानी को टैक्स छूट में दिए जाने वाले लाभ की बात सामने आई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here