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अब कर चोरी करना मुश्किल, जानिये क्या है धारा 148

Posted on: 05 May 2018 18:05 by Lokandra sharma
अब कर चोरी करना मुश्किल, जानिये क्या है धारा 148

इंदौर, (हेमा लोवंशी): आल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ टैक्स प्रेक्टिश्नर्स एसोसिएशन द्वारा इंदौर में आयोजित दो दिवसीय नेशनल टैक्स कांफ्रेंस का शुभारम्भ शनिवार को चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया इंदौर के सीए भवन में हुआ।आल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ टैक्स प्रेक्टिश्नर्स एसोसिएशन, टैक्स प्रेक्टिश्नर्स एसोसिएशन तथा टैक्स बार एट ट्रिब्यूनल द्वारा आयोजित नेशनल टैक्स कांफ्रेंस का शुभारम्भ आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल के अकाउंटेंट मेम्बर सीए मनीष बोरड ने किया।

तुरंत पकड़ में आ जाती है चोरी

सीए मनीष बोरड ने कहा कि आयकर दाताओं को अब टैक्स कम्लायंस करने की आदत बनानी होगीI कंप्यूटरीकृत एन्वोयर्नमेंट में अब कर चोरी करना मुश्किल है तथा किसी भी प्रकार की कर चोरी अब तुरंत पकड़ में आ जाती है I सही तथा ईमानदारी से टैक्स न भरने पर बाद के सालों में ब्याज, पेनाल्टी के साथ ही जेल तक की कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता हैI विभाग पेंडिंग टैक्स केसेस का बड़ी तेजी से डिस्पोजल कर रहा है। अब कर चोरी करने वाले ज्यादा दिन तक बच नहीं पाते हैंI

एआईएफ़टीपीए के नेशनल प्रेसिडेंट सीनियर एडवोकेट गणेश पुरोहित ने भी कहा कि एआईएफ़टीपीए सरकार को टैक्स से संबंधित विभिन्न सुझाव भेजती है तथा उनमें से अधिकांश सुझाव सरकार के द्वारा मान्य भी किये जाते रहे हैंI WhatsApp Image 2018-05-05 at 22.47.25कांफ्रेंस चेयरमेन सीए अभय शर्मा ने कहा कि हम एक ट्रांस्फोर्मेशन फेज से गुजर रहे हैंI नोटबंदी, जीएसटी, इन्सोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड इत्यादि बड़े कर सुधार कानूनों के पश्चात् अब टैक्स कंप्लायंस बहुत बड़ गया है। अब टैक्स चोरी मुश्किल काम हो गया हैI विभाग को करदाताओं से अब सारी जानकारी इनकम टैक्स, जीएसटी रीटर्न इत्यादि के माध्यम से रेडीमेड मिल जाती है, विभाग अब सूचनाओं का क्रॉस वेरिफिकेशन कर रहा है तथा अब रीटर्न की प्रोसेसिंग रियल टाइम में हो रही हैI इसके चलते रिफंड भी समय पर मिलना संभव हो रहा हैI

एआईएफ़टीपी सेंट्रल जोन के चेयरमैन सीए राजेश मेहता ने कहा कि कानून में बहुत गति के साथ एवं महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं , इसिलये टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए वर्तमान में सेमिनार में भाग लेना आवश्यक हो गया हैI उन्होंने कहा कि अब आयकर रिटर्न में जीएसटी से सम्बंधित सूचनाएं भी मांगी जाने लगीं हैंI

जीवन अनिश्चित है

WhatsApp Image 2018-05-05 at 22.47.22कॉन्फ्रेंस के प्रथम तकनीकी सत्र में मुंबई से आए हाई कोर्ट एडवोकेट मंदार वैद्य ने कहा कि अगर पूर्वजों से प्राप्त संपत्ति पर संपत्ति के प्राप्तकर्ता पर कोई आयकर नहीं लगता है इसके साथ एक भाई से दूसरे भाई को पारिवारिक बंटवारे में हस्तांतरित की जाती है तो उस पर मात्र ₹200 की स्टांप ड्यूटी लगती हैI जीवन अनिश्चित है तथा सभी उम्र वर्ग के लोगों को अपने बाद की प्लानिंग वसीयत के द्वारा अवश्य करनी चाहिएI

जयपुर के सीनियर एडवोकेट एन.एम. रांका ने कहा कि वसीयत, प्राइवेट ट्रस्ट, फॅमिली अर्रेंज्मेंट के द्वारा टैक्स प्लानिंग की जा सकती हैI कभी भी टैक्स को मैनेज करने का प्रयास नहीं करना चाहिए , क्योंकि यह महंगा सौदा साबित हो सकता हैI

बैंगलोर के सीए संजय धारीवाल ने कहा कि जीएसटी एक्ट की रचना बहुत ही खूबसूरती से की गई है लेकिन दुर्भाग्यवश इसका इम्प्लीमेंटेशन बहुत ही लापरवाही से किया गया हैI जीएसटी ऑन वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे कितने ही इश्यूज वैट रिजीम में सेटल हो गए थे जो कि जीएसटी में पुन: कोम्प्लिकेटेड हो गए हैंI अतः बहुत से प्रोविजन्स पर पुनर्विचार की आवश्यकता हैI WhatsApp Image 2018-05-05 at 22.47.24मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस अनीता सुमंथ ने कहा कि इनकम टैक्स का कोई भी केस रीओपन करने के लिए रीजन टू बिलीव होना चाहिए की इस केस में करअपवंचन हुआ है मात्र शंका के आधार पर किसी भी केस को रीओपन नहीं किया जा सकता हैI उन्होंने कहा कि कानून की किताबों में लिखे गए कानून को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए लैंडमार्क डिसीजन्स के साथ पढ़कर कोई भी पूर्ण अर्थ निकाला जाना चाहिएI उन्होंने कहा कि लॉ के इंटरर्प्रिटेशन के संशय को कोर्ट द्वारा अपने निर्णयों से दूर किया जाता हैI

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट तथा इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के पूर्व अकाउंटेंट मेम्बर सीए राकेश गुप्ता ने कहा कि किसी भी करदाता को अगर धारा 148 का नोटिस प्राप्त हो तो उसे हलके में न ले और तुरंत विधिक सलाह ले अन्यथा इसके अनुपालन न करने के कठोर परिणाम हो सकते हैं I यह नोटिस प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर अपने आर्थिक व्यवहार को पुनः देखकर आय विवरणी दाखिल करनी होती हैI ऐसा न करने पर आयकर विभाग हायर डिमांड इनिशिएट कर सकता है और पेनल्टी भी लगाई जा सकती हैI आयकर अधिनियम में नोटिस के पालन में विवरणी दाखिल नहीं करने पर प्रॉसिक्यूशन शुरू करने के भी प्रावधान है जिससे लापरवाही के कारण करदाता को जेल भी जाना पड़ सकता हैI WhatsApp Image 2018-05-05 at 22.47.26सेमिनार में वोट ऑफ थैंक्स कांफरेंस कन्वियर तथा एआईएफ़टीपीए के नेशनल जॉइंट सेक्रेटरी एडवोकेट राजेश जोशी ने दियाI सेमिनार में देशभर से पधारे टैक्स प्रोफेशनल्स के साथ ही सीए नरेन्द्र भंडारी, सीए प्रमोद तापडिया, सीए गौरव माहेश्वरी, सीए पंकज शाह, सीए कीर्ति जोशी सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे I

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