मनीषा शर्मा के इस नावेल में समाए हुए हैं प्रेम के कई रंग

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‘ये ईश्क’ मोहब्बत के अहसास को समेटे उन दिलों की दास्तान है, जिन्होने इसे पूरी शिद्दत से जिया है। इन्दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित इस नावेल में प्रेम के अनेक रंग समाए है। कुछ लोगों के लिये यह सिर्फ एक शब्द है और कुछ के लिये जीने की एकमात्र वजह। जितने दिल उतने फसाने, कई रंगों में रंगे हुए पर मूल रंग तो प्रेम का ही है, जिसके आगे फीके है सारे रंग।

चार दोस्त रीमा, शिवानी, जिया और अभि। चारों एक दुसरे से बिल्कुल जुदा पर दोस्ती में एक-दूसरे है जान देने वाले। जी लो जिन्दगी जी भर के, यही है फलसफा इनका यही है अन्दाज इनके जीने का। प्रोफेसर दर्शना और अविनाश की प्रेम कहानी प्रेम के अवक्त रुप को तो जिया की दादी बानो के प्रेम कहानी प्यार की पाकिजगी को सामने लाती है।

रीमा की जिन्दगी में हर दुसरे दिन नये प्रेम का आगमन हो जाता है।पर वह जिसे प्रेम मान रही है वह क्या वाकई प्रेम है? क्या बानो और अदना न समाज के डर से अपनी मोहब्बत का गला घोट देगें ? क्या शिवानी और शुभम का प्यार किसी मुकाम तक पहुँच पायेगा?
इन्ही सवालों के जवाब के लिये पढ़े मेरा नावेल ये ईश्क

डॉ मनीषा शर्मा
नालंदा प्रकाशन

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