अविश्वास प्रस्ताव से किसे-क्या मिला? घमासान डॉट कॉम के संपादक आलोक वाणी की टिप्पणी

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शुक्रवार को विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई लेकिन विपक्ष के पास संख्या बल नहीं होने के कारण ये अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। राहुल गांधी ने भी अपने भाषण में मोदी को जमकर घेरा था लेकिन बाद में मोदी को गले लगा लिया। दिनभर राहुल गांधी के इस व्यवहार की चर्चा होती रही। वाही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का चुन-चुनकर जवाब दिया।

आइए जानते है इस अविश्वास प्रस्ताव से किसे क्या मिला-

तेलुगु देशम पार्टी-
आंध्र प्रदेश में चुकी अगले साल विधानसभा चुनाव है इसलिए टीडीपी चाहती है कि अपनी नाकामी का ठीकरा केंद्र सरकार के सिर फोड़ दिया जाए। आंध्र की जनता को कहा जा सके कि हमने तो बहुत कोशिश की लेकिन केंद्र सरकार ने हमारा साथ नहीं दिया। दूसरी बार BJP बहुत तेजी से आंध्र में पैर पसार रही है, एक डर ये भी चंद्र बाबू नायडू को है इसलिए BJP और नरेंद्र मोदी को वीरेन बनाने के लिए टीडीपी ने अविश्वास प्रस्ताव की भूमिका रची।राहुल गांधी-
दूसरा राहुल गांधी और कांग्रेस को क्या मिला? यह अविश्वास प्रस्ताव की DP लेकर आई थी लेकिन एक तरह से राहुल गांधी ने इसे हाइजैक कर लिया। अगर राहुल गांधी अतिउत्साह में प्रधानमंत्री के गले ना लगते हैं और आंख मारने वाली घटना ना होती तो कल राहुल गांधी ने एक तरफ से महफिल लूट ली थी। लेकिन अपने ही जबरदस्त भाषण पर उन्होंने प्रधानमंत्री के गले पढ़कर और ज्योतिरादित्य सिंधिया को आंख मारकर किए कराए पर पानी फेर दिया।दरअसल कांग्रेस और राहुल गांधी चाहते थे कि महागठबंधन की ताकत दिखाई जाए और उसका नेतृत्व कांग्रेस और राहुल गांधी ही कर सकते हैं। यह मैसेज साफ-साफ सहयोगी पार्टियों को दिया जाए उसमें राहुल गांधी काफी हद तक कामयाब भी हो गए थे, लेकिन ओवरऑल प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिस तरह से राहुल गांधी की झप्पी पर प्रतिक्रिया दी उससे राहुल गांधी की छवि को नुकसान हुआ है और एक बार फिर से साबित हुआ है कि राहुल गांधी एक गंभीर राजनेता नहीं हो सकते। कम से कम 2019 के लिए प्रधानमंत्री पद की उनकी दावेदारी कमजोर हुई है।

पीएम मोदी और बीजेपी-
आखिर में बात नरेंद्र मोदी और BJP की यही अविश्वास प्रस्ताव जब 3 महीने पहले बजट सत्र के दौरान लाने की बात टीडीपी ने कही थी तो लोकसभा स्पीकर और सरकार ने इसे सिरे से नकार दिया था। लेकिन इसी प्रस्ताव को अब मंजूर कर लिया गया। दरअसल मोदी सरकार पर यह आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं कि वह किसी भी संवैधानिक मर्यादा नियम और संवैधानिक संस्थाओं को महत्व नहीं देते इसलिए मोदी सरकार ने यह अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किया।पिछले तीन महीनों में BJP को अपने कई भूले बिछड़े सहयोगियो जैसे शिव सेना, जेडीयू और कई साथियों की याद आई। यानी सरकार एक मजबूत गठबंधन देश के सामने पेश करना चाहती थी और इसमें वह काफी हद तक कामयाब भी हुई। दूसरा नरेंद्र मोदी हर चुनौती को अवसर में बदलने के लिए जाने जाते हैं। अविश्वास प्रस्ताव और अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी के द्वारा की गई घटनाओं को प्रधानमंत्री ने पुरजोर तरीके से बनाया और देश को यह बताने की कोशिश की कि कम से कम उनका विकल्प फिलहाल राहुल गांधी नहीं हो सकते और विपक्ष के पास कोई योजना कोई ठोस रणनीति नहीं है और उनकी सरकार बेहद अच्छा काम कर रही है।

https://www.youtube.com/watch?v=Zo7J4SX-OZ0&feature=youtu.be

मोदी ने राहुल और सोनिया को पूरे समय सीधे निशाने पर रखा और अपनी सरकार की उपलब्धियों का जमकर बखान किया। कुल मिलाकर इस पूरे अविश्वास प्रस्ताव से टीडीपी काफी कुछ बटोरने में कामयाब रही। नरेंद्र मोदी और इंडिया निश्चित रूप से अविश्वास प्रस्ताव के विजेता है और राहुल गांधी और कांग्रेस को इस अविश्वास प्रस्ताव से निराशा ही हाथ लगी है।

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