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लोकतंत्र की नई परंपरा वोटर्स को धमकी बुंदेली में, सचिन चौधरी की बुंदेली बौछार

Posted on: 06 May 2018 07:52 by Ravindra Singh Rana
लोकतंत्र की नई परंपरा वोटर्स को धमकी बुंदेली में, सचिन चौधरी की बुंदेली बौछार

कर्नाटक चुनाव में भाजपा के सीएम उम्मीदवार येदियुरप्पा ने वोटरों के हाथ पैर बांधकर उन्हें घसीटकर वोट डलवाने का बयान दे डाला। वोट लेने का यह नया प्रयोग अगर सफल रहा तो आने वाले चुनावों में इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी शायद लागू करे। आपको शायद चुनावी भाषण भी शायद धमकी भरे सुनने को मिलें। मध्य प्रदेश के चुनावों में बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए ऐसे ही एक बुंदेली भाषण की कल्पना हमने की है। गौर फरमाइए।

मितरो , आप सबने हमाओ नाम तो सुनो हुईए। टी वी पे , रेडियो पे , देश में ,दुनिया में हर जगह अपने नाम से बवाल कट रओ। हम इते तुमाए बुंदेलखंड में आये हैं। सुनों ज्यादा बकर बकर की आदत तो हमाई है नईयां। साफ़ साफ़ सुनों। हम इते धूरा फाँकवे नईं आये। हम आये वोट लेवे। ध्यान से सुनों। वोट मांगवे नईं वोट लेवे। बोलो हमें वोट दे रये के नईं। जे की की के हाथ नईं उठे। तो सुनों गुरु वोट तो तुम का देहो तुमाए डुकर भी देहें। तुमाओ पूरो खानदान भी देहे।
चलो बुंदेलखंड वासियो , तुमसे पूछ रये –
हमें वोट न देहो तो तुमाई सुताई होने चैये की नईं होने चैये
बोलो , होने चैये की नईं होने चैये
तो हम इते तुमाए भले के लाने आये। ताकि तुम हमें वोट दो और हम तुम्हें ठुकाई से बचा सकें।
जे बताओ इत्ते दिन से तुमाए नलों में पानी नईयां , तुम हमाओ कछु उखाड़ पाए ?
तुमाए इलाके में हमने सड़क नईं बनवाई तुम घुइयां छील पाए ?
हमने तुम्हें बेरोजगार बनों रेन दओ तुम कछु हिला पाए ?
जब 15 साल में कछु नईं बिगाड़ पाए हमाओ तो अब का बिगाड़ लेहो

अच्छा सुनों , हम इत्ती दूर से आये सो तुमाए लाने कछु न कछु सौगात तो देने पड़हे

चलो आप सबसें हम पूछ गए
हमें वोट न देहो तो आपकी कितनी टांगे तोड़ दयें
एक टांग ………….
दो टांग ………
दो टांग , एक हाथ …….
दोऊ टांग ,दोऊ हाथ ……..
अरे मेरे मतदाताओं आज आपने खुलकर मांगे है। आपके मन की मुराद पूरी करवे की जिम्मेदारी हमाई है।
एक बात के लाने हम आपसे माफ़ी भी मांग रये। हम आपकी घी से सेवा तो न कर पेहें। वो तो यूपी में हमने 25 रुपैया किलो बांट दओ सो खत्म हो गओ। आप लोग अपनी पसंद को तेल बताओ। डंडा खों आपई की पसंद को तेल पिया के आपकी ठुकाई लगेहैं। आपकी पसंद को ख्याल रखवे की जिम्मेदारी हमाई है।

अच्छा आखिरी बात और ,,,हमें वोट न देहो तो हमाई का है। हम तो फ़कीर हैं। झोला उठाके चले जेहे। लेकिन तुम सबखों कथरी में लपेड़ लपेड़ के इत्ती ठुकाई लगवा जेहेन की शरीर में सूजन के मारे शेप बिगड़ जेहे ,

बाकी वोट हमें अब आप लोग देई देहो , सो हम चले

सचिन चौधरी

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