ना संस्था, ना सरकार, SC ने इन्हें सौंपी राम जन्मभूमि

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ayodhya

रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर 9 नवंबर को फैसला आ गया है। फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आया है। फैसले में सीजेआई ने विवादित जमीन रामलला को सौंप दी है। जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक नया ट्रस्ट बनाने का भी आदेश दिया है जिसे वह जमीन मंदिर निर्माण के लिए दी जाएगी।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला को ही दिया है। रामलला है कौन यह बात शायद ही कोई जानता हो, तो आइए आज जानते है कि कौन है ये रामलला जो राममंदिर के वारिस बने है। यह रामलला ना तो कोई संस्था है और ना ही कोई ट्रस्ट, यहां बात स्वयं भगवान राम के बाल स्वरुप है। सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को लीगल इन्टिटी मानते हुए जमीन का मालिक बनाया है।

सन 1989 में भी विश्व हिंदू परिषद के एक नेता और रिटायर्ड जज देवकी नंदन अग्रवाल ने राम मंदिर के लिए पांचवां दावा फैजाबाद की अदालत में दायर किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि 23 दिसंबर 1949 को राम चबूतरे की मूर्तियां मस्जिद के अंदर रखी गई थीं और जन्म स्थान और भगवान राम दोनों पूज्य हैं और वही इस संपत्ति के मालिक भी हैं।

इसके अलावा 2010 में भी इलाहाबाद कोर्ट ने भी विवादित भूमि को रामजन्म स्थान बताया था। हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन का का तीन बराबर हिस्सें में बंटवारा किया था। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जहां 9 नवंबर को विवादित जमीन रामलला को सौंपी गई और मस्जिद के लिए वैकल्पित 5 एकड़ जमीन देने को कहा गया।

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