इस दिन से शुरू हो रही गुप्त नवरात्रि, सिद्धिया पाने का शुभ अवसर

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NAVRATRI

नई दिल्ली : साल में चार बार नवरात्रि आती हैं। दो सामान्य होती हैं और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। गुप्त नवरात्रि में तंत्र, मंत्र और यंत्र की साधना से 10 गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होता है। आषाढ़ मास की नवरात्रि में शिव और शक्ति की उपासना की जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है। मां भगवती की आराधना दुर्गा सप्तशती से की जाती है। चैत्र मास और आश्विन मास में आने वाली नवरात्रि से ज्यादा महत्व गुप्त नवरात्रि का माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में साधक मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमाता, भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाएगी। पुराणों में लिखा है गुप्त नवरात्रि की पूजन मां सहर्ष स्वीकार करती है लेकिन हम लोग शारदेय और चैत्र नवरात्रि को अधिक महत्व दे‍ते हैं।

‘पाक्षिक-पंचांग’ : आषाढ़ शुक्ल पक्ष
संवत्सर- परिधावी
संवत्- 2076 शक संवत् :1941
माह-आषाढ़
पक्ष- शुक्ल पक्ष (3 जुलाई से 16 जुलाई तक)
ऋतु: वर्षा
रवि: उत्तरायणे
गुरु तारा- उदित स्वरूप
शुक्र तारा- उदित स्वरूप
सर्वार्थ सिद्धि योग- 4 जुलाई, 7 जुलाई, 12 जुलाई, 14 जुलाई
अमृतसिद्धि योग- 3 जुलाई
द्विपुष्कर योग- अनुपस्थितत्रिपुष्कर योग- अनुपस्थित
रविपुष्य योग- अनुपस्थित
गुरुपुष्य योग- 4 जुलाई
एकादशी- 12 जुलाई (देवशयनी एकादशी व्रत)
प्रदोष- 14 जुलाई
भद्रा- 5 जुलाई (उदय)- 6 जुलाई (अस्त), 8 जुलाई (उदय-अस्त), 12 जुलाई (उदय-अस्त), 15 जुलाई (उदय)- 16 जुलाई (अस्त)
पंचक: अनुपस्थित
मूल- 4 जुलाई से प्रारंभ- 6 जुलाई को समाप्त, 13 जुलाई से प्रारंभ- 15 जुलाई को समाप्त
पूर्णिमा- 16 जुलाई (गुरु पूर्णिमा)
ग्रहाचार: सूर्य- मिथुन, चंद्र- (सवा दो दिन में राशि परिवर्तन करते हैं), मंगल- कर्क, बुध-कर्क, गुरु- वृश्चिक, शुक्र- मिथुन, शनि- धनु, राहु- मिथुन, केतु- धनु
व्रत/त्योहार: 3 जुलाई-गुप्त नवरात्रि प्रारंभ, 4 जुलाई- श्री जगन्नाथ रथयात्रा, 10 जुलाई- भड़ली नवमी (अबूझ विवाह मुहूर्त), 12 जुलाई- देवशयन, 16 जुलाई-गुरु पूर्णिमा/ खंडग्रास चंद्रग्रहण
(विशेष- उपर्युक्त गणनाओं में पंचांग भेद होने पर तिथियों/योगों में परिवर्तन संभव है।

गुप्त नवरात्रि में शुभ और मान्य होती है मानसिक पूजा
गुप्त नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। माता की आराधना मनोकामनाओं को पूरा करती है। गुप्त नवरात्र में माता की पूजा देर रात ही की जाती है। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए भक्त को प्रतिपदा के दिन घट स्थापना करना चाहिए। भक्त को सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा करना चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन करने के बाद व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

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