नंदू पांचाल ने आटा चक्की से शुरुआत कर 6 राज्यों तक पहुंचा दिए पांचाल के मसाले

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इंदौर के रहवासी शुरू से ही खानपान के शौकीन है, यहां के लोगों को बेस्ट क्वालिटी प्रोडक्ट के लिए ज्यादा पैसा चुकाने से भी गुरेज नहीं है। मसालों का कारोबार भी स्वाद और स्वास्थ्य से जुड़ा है। पांचाल के मसालों को ऊंचाई तक ले जाने वाले नंद किशोर पांचाल (नंदू भैया) ने घमासान डॉटकॉम से अपने कारोबार और जीवन के अनुभव साझा किए। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश…

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सवाल : आपने करियर की शुरुआत कहां से की?
जवाब : मेरे करियर की आटा-चक्की से शुरुआत हुई। चक्की में मिर्च-मसाले की पिसाई भी करने लगे। धीरे-धीरे रिश्तेदारों और परिचितों को मसाले बेचना शुरू किया, फिर गांव-गांव जाकर मसाले बेचे। समय के साथ-साथ कारोबार बढ़ता चला गया। छोटी से दुकान से शुरू किया गया सफर गांव-गांव तक होकर आज छह राज्यों तक पहुंच गया और जल्द ही विदेश में निर्यात शुरू करने की योजना है। वर्तमान में हम कई तरह के मसाले, जीरावन, तैयार अचार मसालों के साथ मार्केट में अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। दरअसल मसाले का कारोबार स्वाद का कारोबार है और इसमें समझौता कतई मंजूर नहीं है। np

सवाल : कारोबार के साथ-साथ आपने राजनीति भी की, कैसे शुरुआत हुई?
जवाब : बचपन से मैं आरएसएस से जुड़ा हूं। शाखा में जाना मुझे अच्छा लगता था। संघ की शाखा में मुझे राजेंद्र धारकर, नारायणराव धर्म और अन्य लोगों से प्रेरणा मिली। जनसंघ के जमाने से मैं संगठन के लिए काम कर रहा हूं। उन दिनों चुनाव में प्रचार के बहुत ज्यादा संसाधन नहीं होते थे, न ही नेताओं के पास इतना पैसा होता था, उस समय हम लोग सडक़ पर ही चुनाव चिह्न चूने या कलर से लिख देते थे और प्रत्याशी को जीतने की अपील की जाती थी। जनसंघ बाद में भाजपा के रूप में परिवर्तित हुई। तब भी संगठन में काम करता रहा। ताई जब पहला चुनाव लड़ी थीं, तब और आगे भी चंपालाल यादव और अन्य का चुनाव संचालन संभाला। 1989 में राम मंदिर का मुद्दा छाया हुआ था, राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय रहा, उस दौरान 15 दिन जेल में भी रहना पड़ा। चार-पांच दशक के राजनीतिक सफर संगठन में काम किया, उसके बाद मुझे पार्टी ने पार्षद का टिकट दिया और मैं जीता। पार्षद के रूप में क्षेत्र में कई विकास कार्य करवाए। अटलजी से मैं काफी प्रभावित रहा, वहीं लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ताई के साथ काम करने का भी मौका मिला। नारायण धर्म, देवीसिंह राठौर, चंपालाल यादव सहित कई नेताओं के साथ काम किया। आज भी मैं संगठन के लिए काम कर रहा हूं।

सवाल : सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े हैं?
जवाब : विगत आठ साल से लगातार विश्वकर्मा समाज का अध्यक्ष हूं। इस दौरान सूर्यदेव नगर में समाज की धर्मशाला बनवाई। शादी में फिजूल खर्च रोकने के लिए हमने आदर्श विवाह योजना शुरू की, जिसके तहत एक से ज्यादा जोड़ों की शादी एक ही दिन करवाते थे, उस खर्च को सभी में बराबर बांट दिया जाता है, इससे कम खर्च में न सिर्फ विधिवत शादी हो जाती है वहीं परिवार को आर्थिक बचत भी हो जाती है।

सवाल : आपकी हॉबी क्या है?
जवाब : राजनीति और अध्ययन करना मेरा शौक रहा है। धार्मिक और आयुर्वेदिक किताबें जब समय मिलता है, पढ़ता हूं। इसके अलावा अन्य संस्थाओं से भी जुड़ा हूं।

सवाल : परिवार में कौन-कौन हैं?
जवाब : तीन बेटे हैं, तीनों की शादी हो गई है। परिवार में पोते-पोती भी है। तीनों बेटे कारोबार संभाल रहे हैं।

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