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नया इतिहास लिखने वाले अनूठे शख्स का नाम है जी डी अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

Posted on: 04 May 2018 04:46 by Ravindra Singh Rana
नया इतिहास लिखने वाले अनूठे शख्स का नाम है जी डी अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

रीगल चौराहे से तो अक्सर गुजरते हैं और चौराहे से लगी हुई सफेद कोठी को भी आपने कई बार देखा होगा लेकिन इस सफेद कोठी के साथ एक अनूठा इतिहास जुड़ा हुआ है। कहां जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल में यह इमारत सफेद कोठी कहलाती थी बाद में यह नाम चलन से बाहर हो गया इस इमारत का अपना एक ऐतिहासिक महत्व भी है।

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संत विनोबा भावे अपने इंदौर प्रवास के दौरान लगभग 1 महीने तक इसी सफेद कोठी में ठहरे थे वहीं पर उनकी सभाएं भी होती थी साठ के दशक में इस इमारत को देवी अहिल्या के नाम पर अहिल्या पुस्तकालय बना दिया गया और इसका जिम्मा लोक निर्माण विभाग के पास आ गया 70 और 80 के दशक में यह पूरा परिसर अव्यवस्था के साथ ही असामाजिक गतिविधियों, अवैध अतिक्रमण और गलत धंधे का केंद्र बन गया था यहां की लाइब्रेरी भी अवस्था और लालफीताशाही की शिकार थी।

बाद में इस लाइब्रेरी में श्री जीडी अग्रवाल नामक एक अनूठे शख्स का पुस्तकालय अध्यक्ष के रूप में आगमन हुआ और उसके बाद से इस पूरे परिसर का इतिहास बदलता ही चला गया। लाइब्रेरी ना केवल व्यवस्थित हुई बल्कि उस में पाठकों की संख्या की निरंतर बढ़ने लगी लाइब्रेरी के पाठकों के लिए कई नई सुविधाएं यहां पर दी गई और रविवार के दिन लाइब्रेरी खुलने लगी। अन्य सुविधाएं भी पाठकों को मिल सके यह प्रयास भी किया गया और इसमें बहुत सफलता मिली।

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लाइब्रेरी के आसपास के परिसर से सारे अतिक्रमण हटाए गए और फिर यहां पर दुआ सभाग्रह का निर्माण हुआ जिसने इस स्थान को एक सांस्कृतिक साहित्यिक और सामाजिक कार्यक्रमों का केंद्र बना दिया। परिसर में ही बगीचा उजाड़ होकर असामाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ था बाद में इसे एक सुंदर गार्डन का रुप दिया गया और यहां पर नवग्रह के अनुसार नए वृक्ष लगाए गए। हाल ही में हाई कोर्ट द्वारा जब लाइब्रेरी परिसर की जमीन को लेने का प्रयास किया गया तब भी इस जगह की पार्किंग बचाने के लिए एक अभियान चला जिसमें शहर के बुद्धिजीवी लेखक और कलाकार सामने आए।

इस सुंदर परिसर को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि यहां पर कला साहित्य और सामाजिक उद्देश्यों के लिए एक नया इतिहास रचा गया है और इसका पूरा श्रेय श्री जी डी अग्रवाल जी को दिया जा सकता है जिन्होंने इस परिसर में पिछले कई वर्षों से लगातार परिश्रम करके इसे एक नई दिशा और एक नई प्रतिष्ठा प्रदान की । हालांकि श्री जी डी अग्रवाल यहां के पुस्तकालय अध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन उनका योगदान अभी भी यहां पर जारी है । इंदौर के साहित्य कर्मियों , कला कर्मियों को और सभी बुद्धिजीवियों को यह प्रयास करना चाहिए कि श्री अग्रवाल जी यहां पर अपनी सेवाएं लगातार देते रहें और इस परिसर को बचाने के लिए सभी लोग आगे आएं।

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