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मोहन भागवत क्यों नहीं हो सकते अगले प्रधानमंत्री? राजेश ज्वेल की कलम से

Posted on: 19 Sep 2018 13:03 by Ravindra Singh Rana
मोहन भागवत क्यों नहीं हो सकते अगले प्रधानमंत्री? राजेश ज्वेल की कलम से

हिन्दुत्व की सही व्याख्या देश को समझाते मोहन भागवत उन महामूर्ख भक्तों को भी सरेआम नंगा कर देते हैं जो रात-दिन हिन्दू-मुस्लिम टॉपिक पर दिमाग का दही करते हैं। हर मुद्दे पर हिन्दू धर्म खतरे में है की दुहाई देने वालों को भागवत जी ने वाकई कसकर जूता मारा है… बाई गॉड की कसम अपन तो भागवत जी के मुरीद हो गए। बस वे कुछ और सवालों के इसी तरह से साफगोई से जवाब दे दें तो जननेता के रूप में भी स्वीकार्य हो सकते हैं।

फेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर दिनभर ये सवाल पूछे जाते हैं कि मोदी के बाद कौन..? मोदी का विकल्प कौन..? और मोदी जी नहीं रहे तो हिन्दू धर्म खतरे में पड़ जाएगा… अब इन ढक्कनों को कौन समझाए कि जब मुगलों और उसके बाद अंग्रेजों ने देश पर सैंकड़ों साल राज किया और कई मंदिरों को तोड़ा तब भी हिन्दू धर्म न तो खतरे में पड़ा और न समाप्त हुआ।

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अब तो दुनिया ही बदल गई है। भागवत जी ने सौ टका सही कहा कि हिन्दुत्व को साम्प्रदायिकता से जोडऩे वाले ही समाज को तोड़ रहे हैं और जिस दिन हम कहेंगे कि मुसलमान नहीं चाहिए, उस दिन हिन्दुत्व भी नहीं रहेगा। अब इस स्पष्ट व्याख्या के बाद हिन्दुत्व के कथित झंडाबरदारों की कलई खुल जाती है।

अगर यही बयान किसी और ने दिया होता तो सोशल मीडिया के साथ देशभर में भूचाल आ जाता… भागवत जी ने कांग्रेसमुक्त भारत का दावा करने वालों को भी धो डाला, जब उन्होंने कहा कि देश की आजादी में कांग्रेस का योगदान महत्वपूर्ण रहा और उसने कई नामी नेता दिए। भविष्य का भारत कैसा हो इस पर संघ की चर्चा में भागवत जी ने हिन्दुत्व की जो व्याख्या की उसमें सभी मतावलम्बियों के लिए जगह बताई। अब समय आ गया है कि संघ को पर्दे के पीछे की बजाय सीधी राजनीति करना चाहिए और देश के सामने जो सवाल खड़ा किया जाता है उसका सटीक जवाब यह भी है कि मोहन भागवत क्यों नहीं हो सकते देश के अगले प्रधानमंत्री..? एक अहंकारी और बड़बोले नेता की बजाय क्या यह चयन देशहित में नहीं होगा..? क्या बोलते हो मितरों..?

राजेश ज्वेल

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