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रहस्य: रात्रि में ही क्यों निकाल्री जाती है किन्नरों की शवयात्रा?

Posted on: 30 Jun 2018 13:48 by krishnpal rathore
रहस्य: रात्रि में ही क्यों निकाल्री जाती है किन्नरों की शवयात्रा?

नई दिल्ली: किन्नरों को तो आप सभी ने देखा होगा, लेकिन कभी आपने किन्नरों के रिती -रिवाज के बारे में जानना चाहा है? किन्नर लोग हिदू धर्म में आते है. किन्नरों को हमारे समाज में तीसरा स्थान दिया गया है, यानी ‘थर्ड जेंडर’ माना गया है. आप सभी जानते है की इनकी जिन्दगी हमारी तरह नहीं होती है.किन्नरों के जीवनयापन करने से लगाकर रहन-सहन सभी अलग होते है.आज हम आपको इनके जीवन के बारे में कुछ आनोखी बात बताने जा रहे है.आपको बता दे की इन किन्नरों का जन्म से लेकर मरण तक इनके अलग-अलग निति नियम है.आपने इनके जन्म की खबरें देखी होंगी या इनकी समस्याओ से वाकिफ होंगे लेकिन कभी आपने किसी किन्नर की शव यात्रा नहीं देखी होगी. आज हम आपको इन किन्नरों की रहस्यमय दुनिया से रूबरू कराने जा रहे है. आपको बता दे की किन्नर लोगो की मृयु के बात इनके शव को छुपा कर रखा जाता है. अक्सर शव यात्रा दिन में निकाली जाती है, लेकिन इन किन्नरों की शव यात्रा हमेशा रात में निकाली जाती है. बात यह है,की इनकी शव यात्रा रात को इसलिए निकाली है ताकि कोई आम आदमी इनकी शव यात्रा न देख सके. ये लोग एसा क्यों करते है,आएये जाने …..

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इन किन्नरो में एसी प्रथा अनोखी होती है. इसके साथ ये भी माना है कि इस शव यात्रा में इनके समुदाय के अलावा दूसरे समुदाय के किन्नर भी शामिल नहीं होते है. किन्नर समाज में किसी की मौत होने पर ये लोग बिल्कुल भी शोक नहीं मनाते है. क्योंकि इन लोगो का नियम है, कि मरने से उसे इस नर्क वाले जीवन से छुटकारा मिल जाता है. इसी कारण से ये लोग चाहे जितने भी दुखी हों, लेकिन किसी अपने की मौत पर खुशियां ही मनाते हैं. ये लोग इस खुशी में पैसे भी दान में देते हैं,और ये दुआ करते हैं कि भगवान जाने वाले को अच्छा जन्म दे. सबसे अलग बात तो यह है कि किन्नरों के समाज में किसी की मौत होने पर ये लोग शव को अंतिम संस्कार से पहले जूते-चप्पलों से मारते हैं. मीडिया रिपोर्ट से पता चला है.कि ऐसा करने से मरने वाले के सारे पापों का प्रायश्चित होता है. हालांकि किन्नर हिन्दू धर्म को ही मानते हैं, लेकिन ये लोग शव को जलाते नहीं हैं बल्कि उसे दफनाते हैं.

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