हर महीने 16 करोड़ बचाएगा नगर निगम | Municipal Corporation will SAVE 16 Million Every Month

0
54
solar energy

देश में स्वच्छता रैकिंग में नंबर-वन की हैट्रिक लगाने वाला इंदौर नगर निगम अब एक और कामयाबी की तरफ कदम बढ़ाने वाला है। नगर निगम में बिजली उत्पादन के मामले में अपने आप को सक्षम बनाने के लिए शहर में 100 मेगावाॅट बिजली का सोलर प्लांट लगाने के लिए 4 हजार 50 करोड़ के बांड खरीदने वाली है। इसके लिए नगर निगम लंदन स्टाॅक एक्सचेंज में ग्रीन मसाला बांड के नाम से लिस्टेड होने जा रहा है। इसके लिए प्रदेश स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी है। नगर निगम लंदन स्टाॅक एक्सचेंज में लिस्टेड होने के लिए मूडीज जैसी एजेंसी की मदद ले सकती है। ग्रीन बांड लाने से सोलर एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जलूद का 16 करोड़ रूपए प्रतिमाह का बिजली बिल भी बचाया जाएगा। विश्व में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां है ,जो ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने वाले प्रोजेक्ट में निवेश करना चाहती है।

Read More : शेयर बाजार : मामूली बढ़त के साथ खुला सेंसेक्स

निगम आयुक्त आशीषसिंह के मुताबिक इंदौर में सौ मेगावाॅट बिजली उत्पादित करने वाला सोलर प्लांट की प्रदेश सरकार से भी अनुमति मिल गई है। हालांकि इस संबंध में प्रमुख सचिव एसआर मोहंती, अपर मुख्य सचिव उर्जा विभाग और नगर निगम के अफसरों के बीच बैठक भी हो चुकी है। सिंह ने बताया इंदौर निगम के इस प्रोजेक्ट से प्रदेश की ब्राॅडिंग ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने वाले प्रदेशों में होगी। साथ ही विश्व स्तरीय कंपनी ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में सीधे प्रदेश में निवेश करेगी। देश में किसी नगरीय निकाय का यह पहला प्रोजेक्ट होगा, जो लंदन स्टाॅक एक्सचेंज में लिस्टेड होगा। बताया जा रहा है प्रोजेक्ट लगाने के लिए करीब 40 एकड़ जमीन की जरूरत होगी, जिस पर भी काम शुरू कर दिया गया है। सिंह ने बताया कि हमारे पास जलूद में यह जमीन उपलब्ध है, लेकिन हम फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने पर भी विचार कर रहे हैं, जिसके लिए यशवंत सागर का चयन भी किया जा सकता है। फ्लोटिंग सोलर प्लांट जमीन पर लगने वाले प्लांट की तुलना में ज्यादा और जल्दी बिजली उत्पादन की क्षमता रखते हैं।

बिजली खर्च में होगी सीधी बचत

नर्मदा लाइन का बिजली फिल 16 करोड़ रूपए आता है। सोलर प्लांट लगने के बाद यह बिल सीधे आधा हो जाएगा, क्योंकि फिलहाल बिजली कंपनी 5 रूपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली देती है। सोलर प्लांट लगने के बाद 2.50 रूपए प्रति यूनिट खर्च होगा। वहीं प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स के अनुसार सौ मेगावाट बिजली की दर दस करोड़ रूपए आंकी गई है। जिससे हम बांड पर लगने वाला ब्याज और निवेशकों की मूल राशि आसानी से चुका सकेंगे। इसका फायदा राज्य सरकार को भी होगा, क्योंकि आगामी दस सालों में सोलर प्लांट की कीमत वसूल हो जाएगी और राज्य सरकार से जो अनुदान हमें बिजली बिल के लिए अभी प्रतिमाह लेना पड़ता है, उसकी जरूरत नहीं होगी।  सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने में कुछ बाधाएं भी है। जिसमें उर्जा विभाग के उस नियम को भी परिवर्तन करना होगा, जिसमें केवल दो मेगावाॅट तक नेट मीटरिंग अनुमति दी जाती है। हमें 100 मेगावाॅट सोलर प्लांट के लिए मीटरिंग की जरूरत होगी। इसके साथ ही मूडीज की शर्तों पर नगर निगम की बैलेंस सीट अपडेट करना होगा और राज्य को सरकार को बांड की गारंटी देनी होगी।

 डाॅलर की कीमत का असर नहीं होगा

निगम आयुक्त सिंह ने बताया कि इंदौर नगर निगम का यह ग्रीन मसाला बांड होगा। अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में मसाला बांड का चलन है। यह बांड लंदन स्टाॅक एक्सचेंज में भारतीय कंपनियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो भारतीय मुद्रा पर आधारित है। इस पर डाॅलर की कीमत ब़ढने या घटने का कोई असर नहीं होता है। सिंह ने कहा कि मसाला बांड लेना इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह बांड नहीं लिया जाता है तो हमारे बांड की राशि 4 हजार 50 करोड़ डाॅलर मानी जाएगी। अगर हम मसाला बांड जारी नहीं करते हैं तो भविष्य में रूपया कमजोर हाता है और डाॅलर की कीमत बढ़ती है तो हमें बांड की राशि डाॅलर के हिसाब से निवेशकों को लौटानी होगी, किंतु हम मसाला बांड जारी करते है तो निगम को यह राशि भारतीय मुद्रा रूपया के अनुसार 4 हजार 50 करोड़ का भुगतान करना होगा।

Read More : बैंकाक में इंदौर नगर निगम को मिला ग्लोबल वेस्ट मैनेजमेंट अवॉर्ड

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here