धोनी के बलिदान बैज पर बोले फैन- पकड़ा जाय तो चोर वरना साहूकार | MS Dhoni Army Insignia Fans reaction on Badge in ICC Cricket World Cup 2019

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धोनी के बलिदान बैज पर इंग्लैंड में राय यही है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। दूसरी टीमों और खिलाड़ियों ने कई बार ऐसा किया है। बात बस इतनी है कि नजर पड़ जाए और हंगामा करना ही मकसद हो।” पकड़ा जाए तो चोर ” वाला हिसाब सारी दुनिया में चलता है । यहां भी यही हुआ है । इंग्लैंड में क्लब क्रिकेट खेलने ( एसेक्स कॉउंटी ) वाले दिलीप राउकर का कहना है कि अगर सवाल उठाना ही था , तो तब क्यों नहीं उठाया जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में पूरी भारतीय टीम सेना की टोपी पहनकर उतरी थी। तब भी सब खामोश थे ,जब 2007 विश्व कप के फाइनल में एडम गिलक्रिस्ट ने बैटिंग के दौरान दस्तानों में स्क्वाश बॉल रखी थी ताकि बड़े शॉट लगाना आसान हो जाए । शतक के बाद उसे दिखाया भी और खुद की कॉलर भी खड़ी की। तब किसी को परेशानी नहीं हुई ।

अच्छे काम के प्रमोशन में भी अगर दिक्कत है, तो फिर साउथ अफ्रीकी टीम को गुलाबी जर्सी पहनने की इजाजत क्यों दी जाती है। बात अगर धर्म और राष्ट्रवाद की है, तो पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मैदान पर सजदा करने से क्यों नहीं रोका जाता ।धोनी ने कोई अलग काम नहीं किया है बस अपनी सेना के प्रति जज्बात जाहिर किए हैं । फुटबॉल में भी खिलाड़ी अपनी सेना या किसी और चीज के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए उनकी निशानी पहनते हैं । सिंगापुर से विश्व कप देखने पहुंचे सिद्धार्थ का कहना है कि झगड़ा यहां बैज का नहीं आईसीसी के अहं का है । वह गुस्सा इस बात से नहीं है ,कि धोनी ने बैज क्यों पहना ,उन्हें तो मिर्ची इस बात की लगी है कि हमसे पूछा क्यों नहीं ।

पाकिस्तान पर तो बात ही नहीं करना चाहिए उनकी हालत खिसियाई बिल्ली जैसी है । पाकिस्तान से आकर इंग्लैंड में बस चुके मोहम्मद सिद्दीकी कहते हैं कि हमें इस बहस में पढ़ना ही नहीं चाहिए । खेल पर ध्यान देना चाहिए । टी-शर्ट ,दस्ताने ,जूते से ऊपर उठकर क्रिकेट देखेंगे तो मजा आएगा। अब ऐसा तो है नहीं की दस्तानों पर बैज लगा लेंगे तो धोनी हर गेंद पकड़ लेंगे या निकाल देंगे तो उनसे गेंद नहीं पकड़ाएगी ।आखिर कब हमारी समझ गहरी होगी ।हमें इन चीजों पर बात ही नहीं करना चाहिए। स्ट्रैटफोर्ड में रहने वाले बॉरिस का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के दर्शक हैं तो अच्छे लेकिन यहीं गलती कर जाते हैं। मुद्दों से भटकना उनकी पुरानी आदत है ।यह बहस बेकार की है जो क्रिकेट से ध्यान भटका रही है ।

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