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एक आवाज़ में मुम्बई को जाम कर देने वाले एक विद्रोही स्वभाव के नेता श्री जार्ज फ़र्नान्डिज आज नहीं रहे!

Posted on: 29 Jan 2019 10:34 by Ravindra Singh Rana
एक आवाज़ में मुम्बई को जाम कर देने वाले एक विद्रोही स्वभाव के नेता श्री जार्ज फ़र्नान्डिज आज नहीं रहे!

लेखक – नारायण पटेल

अपने अचूक तर्कों और विद्रोही स्वभाव से विरोधियों को सन्न कर देने वाले पूर्व रक्षा मंत्री श्री जॉर्ज फर्नांडिज जी का मंगलवार को निधन हो गया. वह 88 साल के थे. वे अटलजी के प्रिय थे और उनके मंत्रिमंडल में रक्षामंत्री बनाये गए थे। उन्होंने रक्षामंत्री रहते हुए देश की दुर्गम सीमाओं का दौरा भी किया। एक बार लोकसभा में उन्होंने एक टिप्पणी कर कांग्रेस की बोलती बंद कर दी, विवाद बढ़ता देख पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर खड़े हो गए और बोले कि मैं जार्ज को जानता हूँ, अगर उन्होंने कोई बात बोली है तो उनके पास जरूर तथ्य भी होंगे,इसलिए कांग्रेसी मित्रों आप हंगामा न करें।

3 जून, 1930 को जन्मे जॉर्ज फर्नांडिस 10 भाषाओं के जानकार थे – हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन. उनकी मां किंग जॉर्ज पंचम की बड़ी प्रशंसक थीं. उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था.मंगलौर में पले-बढ़े फर्नांडिस जब 16 साल के हुए तो एक क्रिश्चियन मिशनरी में पादरी बनने की शिक्षा लेने भेजे गए. पर चर्च में पाखंड देखकर उनका उससे मोहभंग हो गया. उन्होंने 18 साल की उम्र में चर्च छोड़ दिया और रोजगार की तलाश में बंबई चले आए।

जॉर्ज खुद बताते हैं कि इस दौरान वे चौपाटी की बेंच पर सोया करते थे और लगातार सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन आंदोलन के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे. फर्नांडिस की शुरुआती छवि एक जबरदस्त विद्रोही की थी. उस वक्त मुखर वक्ता राम मनोहर लोहिया, फर्नांडिस की प्रेरणा थे.1950 आते-आते वे टैक्सी ड्राइवर यूनियन के बेताज बादशाह बन गए. बिखरे बाल, और पतले चेहरे वाले फर्नांडिस, तुड़े-मुड़े खादी के कुर्ते-पायजामे, घिसी हुई चप्पलों और चश्मे में खांटी एक्टिविस्ट लगा करते थे. कुछ लोग तभी से उन्हें ‘अनथक विद्रोही’ (रिबेल विद्आउट ए पॉज़) कहने लगे थे.भले ही मध्यवर्गीय और उच्चवर्गीय लोग उस वक्त फर्नांडिस को बदमाश और तोड़-फोड़ करने वाला मानते हों पर बंबई के सैकड़ों-हजारों गरीबों के लिए वे एक हीरो थे, मसीहा थे।

इसी दौरान 1967 के लोकसभा चुनावों में वे उस समय के बड़े कांग्रेसी नेताओं में से एक एसके पाटिल के सामने मैदान में उतरे. बॉम्बे साउथ की इस सीट से जब उन्होंने पाटिल को हराया तो लोग उन्हें ‘जॉर्ज द जायंट किलर’ भी कहने लगे.एक हवाई यात्रा के दौरान जॉर्ज की मुलाकात लैला कबीर से हुई थी. लैला पूर्व केंद्रीय मंत्री हुमायूं कबीर की बेटी थीं. दोनों ने कुछ वक्त एक-दूसरे को डेट किया और फिर शादी कर ली. उनका एक बेटा शॉन फर्नांडिस है जो न्यूयॉर्क में इंवेस्टमेंट बैंकर है. कहा जाता है बाद में जया जेटली से जॉर्ज की नजदीकियां बढ़ने पर लैला उन्हें छोड़कर चली गई थीं. हालांकि बाद में वे जॉर्ज की बीमारी की बात सुनकर 2010 में वापस लौट आईं. इस समय सार्वजनिक जीवन से बिलकुल कटे जॉर्ज फर्नांडिस को अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी बीमारियों से ग्रस्त बताया जाता है।भारत ने आज एक कद्दावर और जुझारू नेता खो दिया, वो मेरे पसंदीदा नेताओं में से एक थे। उनके निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उन्हें शत शत नमन करता हूँ।

 

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