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म.प्र. : जश्न-ए-उर्दू के नाम पर चल रहा अनियमितता का खेल, बाहरी लोगों को दी जा रही मोटी रकम

Posted on: 08 Jul 2019 19:32 by bharat prajapat
म.प्र. : जश्न-ए-उर्दू के नाम पर चल रहा अनियमितता का खेल, बाहरी लोगों को दी जा रही मोटी रकम

मध्यप्रदेश अकादमी के कदम पिछले कुछ सालों में एक नई कहानी लिखने की तरफ बढ़ चले हैं। उर्दू भाषा की तरक्की के लिए बनाए गए इस इदारे से भाषा विकास के अलावा सभी काम हो रहे हैं। पिछले दस सालों में यहां मुशायरों और नशिस्तों के नाम पर बजट का करोड़ों रुपए हवा कर दिया गया है, जबकि इससे न शहर या प्रदेश को तो कोई फायदा नहीं मिला लेकिन अकादमी सचिव को इससे बड़े फायदे मिले हैं। अकादमी में आने के बाद खुद को शायरा निरूपित कर लेने वाली अकादमी सचिव नुसरत मेहदी ने गिव एंड टेक की नई तकनीक पर काम शुरू किया और देशभर के अलावा विदेशों से भी सिर्फ उन शायरों को अकादमी कार्यक्रमों में पढ़वाया जा रहा है, जो सचिव अपने शहर, प्रदेश या देश में पढ़वाने की काबिलियत रखते हैं। इस दौरान घर के शायरों को निम्नतम नजराना देकर बाहरी लोगों को मोटी रकम अदा करने की परंपरा भी चला दी गई है।

जश्न-ए-उर्दू के नाम पर अकादमी ने बड़ी आर्थिक अनियमितताएं की हैं। संस्कृति विभाग के अफसरों और पिछली भाजपा सरकार के कुछ नेताओं की करीबी का फायदा उठाकर वे लगातार आयोजन के नाम पर विभाग के बजट को नुकसान पहुचाती आई हैं।

नुसरत मेहदी साहिबा के सचिव कार्यकाल में पूरे मप्र में किए गए हर आयोजन के दौरान होने वाले हर शहर में भोपाल की बिजली और सजावट लगना भी इनमे हुए भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है। एक ही संस्था को बार-बार काम दिए जाने की हद ये कि अकादमी ने दावतनामा, फ्लैक्स, बेनर आदि पर ही लाखों रुपए का खर्च कर दिया है।

पिछले कुछ सालों के अकादमी हिसाब को देखा जाए इसमे विविध खर्च के नाम पर ही लाखों रुपए दर्शा दिए गए हैं। जबकि नियमानुसार विविध खर्च में महज छोटे और न गिने जाने जैसे खर्च ही शामिल किए जा सकते हैं। अकादमी सचिव नुसरत मेहदी ने ये खर्च उन लोगों के लिए निकाला है, जिन्हें उन्होंने अकादमी में बिना अधिकार, बिना अनुमति और बिना जरूरत अपने जाती मफाद के लिए पाबंद कर रखा है।

उर्दू विकास और प्रदेश भर से शायरों की खोज के नाम पर बनाई गई जिला और सम्भागीय टीमों में नुसरत मेहदी ने ऐसे लोगों को शामिल कर दिया है, जो खुद ही उर्दू के जानकार नहीं हैं और न ही उनका अदब में कोई दखल या उपलब्धि है। पिछले कुछ सालों में दिए गए विभिन्न अवार्ड में भी यही हालात बने हैं।

मप्र उर्दू अकादमी में सूचना का अधिकार नियम-2005 की भी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। यहां से चाही गई किसी भी जानकारी के लिए अकादमी सचिव की तरफ से जवाब अनुत्तरित ही रहता है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई एक जानकारी के लिए अकादमी ने महज 4 रुपए जमा करवाने के लिए 80 किलोमीटर दूर से एक शायर साहब को बुलवा लिया। इनके बाद भी उन्हें मांगी गई जानकारी देने से इनकार कर दिया गया।

सालों से की जा रही शिकायतों पर भाजपा सरकार के दौरान कोई कार्यवाही नहीं की गई। लेकिन कांग्रेस सरकार के आते ही जब संस्कृति परिषद ने उर्दू अकादमी की अनियमितता की जांच के आदेश दिए तो अधिकारियों की मिलीभगत से नुसरत मेहदी ने इस जांच को भी प्रभावित करवा दिया है। पहले जांच अधिकारी लाजवंती अभिचन्दानी को विदेश यात्रा पर भेज दिया गया और जब जांच शुरू हुई तो उसमे लीपापोती की जा रही है। जांच के दौरान दोषी अफसर का पद और जांच कक्ष में मौजूद रहना निष्पक्ष जांच की उम्मीदों को बिखेरती रही है।

इन तमाम मामलों में संस्कृति विभाग के आला अधिकारियों की भूमिका में संदिग्ध दिखाई देती है।

नुसरत मेहदी के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच कर उन्हें तत्काल अकादमी सचिव पद से हटाकर तत्काल उनके मूल विभाग शिक्षा विभाग में भेजा जाना चाहिए ताकि अकादमी के रुके काम पूरे हो सकें।

डॉ युनुस फरहत
अध्यक्ष
ऑल इंडिया उर्दू राब्ता कमेटी

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