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म.प्र. सहित चार राज्यों में कई सांसदों-विधायकों का कट सकता है टिकट

Posted on: 24 Jun 2018 10:41 by Praveen Rathore
म.प्र. सहित चार राज्यों में कई सांसदों-विधायकों का कट सकता है टिकट

इंदौर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ न सिर्फ कांग्रेस बल्कि सभी क्षेत्रीय दलों ने एकजुटता दिखाई है। पिछले दिनों सभी विपक्षी दलों के भाजपा मुक्त भारत के अह्वान के साथ एक मंच पर आने के बाद आरएसएस और भाजपा को अंदरुनी चिंतन करने के लिए मजबूर किया है। भाजपा और आरएसएस की बैठकों में इस विपक्षी एकता पर विचार-मंथन शुरू हो चुका है। भाजपा और संघ की हाल ही  संपन्न हुई बैठक में संघ ने भाजपा को आइना दिखाया दिया है, भले ही यह चिंतन विपक्षी एकता के लिए होना संघ और भाजपा नकार दे, लेकिन यह सच्चाई भी किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा के कार्यकर्ता और नेताओं के कमजोर प्रदर्शन और पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजी दूर करने सहित संघ ने उन राज्यों में फोकस करने के लिए भाजपा प्रमुख अमित शाह को कहा है, जहां भाजपा ने एक भी सीट नहीं जीती या पिछले चुनाव में उन्हें वहां काफी कम अंतर से सीटें गंवानी पड़ी है।

कार्यकर्ताओं की नाराजी व् कमजोर प्रदर्शन महंगा पड़ेगा सांसदों को
संघ-भाजपा के बीच इस बात पर भी मंथन हुआ है कि भाजपा के मौजूदा सांसद और विधायकों का परफार्मेंस कमजोर है और इस चुनाव में उनको मौका देना भाजपा के लिए महंगा साबित हो सकता है क्योंकि सारे विपक्षी दल एक मंच पर आ गए हैं। हालांकि यह भी तय है कि अभी ऐसी किसी बड़ी पार्टियों का चुनावी गठबंधन का ऐलान नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि इस चुनाव में भाजपा के मौजूदा विधायकों और सांसदों में तीस से चालीस फीसदी को विधायकों-सांसदों को मौका नहीं देते हुए भाजपा नए चेहरों को मौका दे सकती है। ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है कि बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं में भाजपा सरकार को लेकर नाराजी है और ऐसी खबरें समय-समय पर मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात से आती रही हैं।

122 सीटों पर चुनौती 
संघ की रिपोर्ट के बाद भाजपा अपनी रणनीति में परिवर्तन करेगी। अगले चुनाव में आधे से अधिक सांसदों के टिकट कटने की आशंका है। भाजपा ने अगले आम चुनाव में 350 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। इस उद्देश्य से 122 उन सीटों के लिए 24 नेताओं की एक टीम तैयारी की है, जहां पार्टी कभी भी नहीं जीती है। पश्चिम बंगाल के लिए तीन नेताओं, केरल में दो, आंध्र में दो नेताओं को झोंका गया है। इन नेताओं के कामकाज की निगरानी स्वयं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह करेंगे। पार्टी पिछले चुनाव में 282 सीटें जीत चुकी है और 150 सीटों पर दूसरे नम्बर पर रही। इन सभी सीटों पर पार्टी का फोकस अलग है। इन सीटों के लिए अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं। सबसे बड़ी चुनौती 122 सीटों पर है जहां भाजपा कभी जीती ही नहीं। उत्तर प्रदेश में सप-बसपा गठबंधन का प्रयोग जारी रहा तो कम से कम 35 सीटें सीधे भाजपा की झोली से निकल जाएंगी। इसका विकल्प तलाशने को कहा गया है।

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