बहुत मिस करता हूं इंदौर की घमंडी लस्सी: राज्यवर्धन सिंह

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इंदौर| जयपुर ग्रामीण से भाजपा सांसद और ओलंपियन राज्यवर्धन सिंह राठौर मैनेजमेंट एसोसिएशन की सीईओ मीट में शामिल होने इंदौर आए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि इंदौर से मेरा पुराना नाता है। पहले ट्रेन से आता था। इस बार प्लेन से आया हूं। इंदौर की घमंडी लस्सी खूब खाई और मिस भी बहुत करता हूं। जब महू में दोस्तों से कभी शर्त लगती थी, तो समोसा खाया करते थे। उन्होंने इस सवाल के जवाब में कहा कि एक बार मैं राजनीति के कारण निशानाबाजी में खेल नहीं पाया था, इसलिए सिस्टम को सुधारन के लिए राजनीति में आया हूं, ताकि खिलाड़ियों को सम्मान और सही सुविधा मिल सके।

इस दौरान उन्होंने मीट को संबोधित करत हुए कहा कि अगर चुनौतियों की बता करें, तो मुझे जीवन में कई चुनौतियां मिली, लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि वो जीत ही क्या, जिसमें चुनौती ना हो। मीट के दौरान कर्नल ने अपने कई अनुभव साझा किए।

उन्होंने कहा कि लोग मुझे कहते थे कि आप कुछ नहीं कर पाओगे। देश में ही खेल लो। एक बार ओलंपिक में जीतने के बाद दूसरी बार जाने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि जिस तरह खेल में चुनौती मिलती है, वैसी ही जीवन में भी चुनौतियां मिलती रहती है। एक वाक्या बताते हुए सिंह ने बताया कि मुझे निशानेबाजी के क्षेत्र में जाने के लिए आॅर्म लाइसेंस चाहिए था। दिल्ली पुलिस ने कई दिन तक दफ्तर के चक्कर लगवाए, लेकिन बार-बार चक्कर लगाकर परेशान हो चुका था। एक बार तो में सात घंटे तक थाने में ही बैठा रहा, तब जाकर मेरा लाइसेंस बना था। उन्होंने सक्सेस को खेलों से जोड़ते हुए कहा कि क्रिकेट में बाॅल बैट के सही से टकराती है, तो उसकी एक अलग ही आवाज आती है। ऐसे ही जीवन में संघर्ष के बाद जब लक्ष्य प्राप्त होता है, तो इसकी आवाज का एहसास होता है कि कुछ लोग अपने अचीवमेंट जिंदगीभर बताते रहते हैं, किंतु एक दिन ऐसा भी आता है, जब कहा जाता है कि आपके अचीवमेंट छोटे है ।

इसके बाद इंसान को अहसास होता है कि उसने क्या कमी छोड़ दी थी। मुझे भी कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था। कर्नल राठौड़ ने कहा कि मेरे लिए इज्जत सबसे महत्वपूर्ण है। जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, कभी शिखर पर जाते हैं, तो कभी नीचे आ जाते हैं। ऐसे में मैं हमेशा बैलेंस बनाकर रहता हूं। मैंने अपने जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक बार ऐसा समय भी आया जब राजनीति के कारण खेल नहीं पा रहा था। मेरा मानना है कि ऐसी ही परेशानियों से आपको लड़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं।

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