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दो तिहाई से ज्यादा हिंदुस्तान ने किया मताधिकार का प्रयोग

Posted on: 02 May 2019 18:39 by Surbhi Bhawsar
दो तिहाई से ज्यादा हिंदुस्तान ने किया मताधिकार का प्रयोग

अप्रैल बीतने के एक दिन पहले सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव का चौथा चरण संपन्न हुआ। चौथे चरण में नौ राज्यों की 71 सीटों के लिए मतदान हुआ, जिसमें करीब पैंसठ प्रतिशत मतदाता घरों से निकले और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस दौर को मिलाकर देश की दो तिहाई से ज्यादा यानी 374 (69 फीसदी) सीटों पर चुनाव हो चुके हैं। अब 31 फीसदी से कुछ ज्यादा सीटें ही बची है, जिनके चुनाव तीन चरणों में होना है। इनमें पांचवा चरण नौ मई को, छठा चरण 12 मई को और सातवां चरण 19 मई को होगा। इन चरणों में क्रमशः 51 व 595 सीटों के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

इसके बाद 23 मई को पूरे देश में एकसाथ मतगणना होगी और उसी दिन दोपहर होते-होते तय हो जाएगा कि देश में अगले पांच साल राज कौन करेगा। इस चुनाव में मोटे तौर पर न मोदी लहर थी और न ही राहुल गांधी का माहौ बना। क्षेत्रीय दलों के अपनेन मुद्दे और अपना दायरा था, लेकिन उनका असर और मोदी के व्यक्तित्व में कौन प्रभावी रहा, इसके बारे में राजनीतिक विश्लेषक भरोसे के साथ कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।

इतना तय है कि चुनाव का स्वरुप भाजपा विरुद्ध बाकी सभी दल की तरह रहा। इतना जरूर है कि विपक्ष तमाम कोशिशों के बाद भी बिखरा-बिखरा ही रहा। लिहाजा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) जैसा कुछ चुनाव में नहीं था। कभी यूपीए का प्रमुख हिस्सा रहे वामपंथी अब अलग-थलग पड़े हैं। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी का गठबंधन उत्तर प्रदेश तक ही सीमित रहा, लेकिन वहां उसका मुकाबला भाजपा के अलावा कांग्ररेस के साथ भी हुआ। उसका असर चुनाव मैदान पर कितना पड़ा इसका फैसला भी नतीजों से ही हो पाएगा।

वैसे पुलवामा हमले के बाद बालाकोट पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक से जो माहौल बना था उसे भाजपा पूरी तरह नहीं भुना पाई। बड़े भाजपाई नेताओं का ज्यादातर समय राहुल गांधी के खिलाफ बोलने में लगा रहा। यह रणनीति थी या राजनीतिक मजबूरी इसका जवाब भी भाजपा के रणनीतिकार ही दे सकते हैं। जो भी हो आग उगलती गर्मी के बीच पैंसठ फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर यह तो जता ही दिया कि वे अपने मताधिकार को लेकर कितने जागरूक हैं। नतीजे जो भी निकलें मतदान का बेहतर प्रतिशत देश की आम जनता की जीत है, क्योंकि तमाम विसंगतियों के बाद भी वह मतदान करने के लिए कतारों में लगती जरूर है।

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