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जनकपुर में बोले मोदी, नेपाल के बिना राम भी अधूरे

Posted on: 11 May 2018 05:33 by Surbhi Bhawsar
जनकपुर में बोले मोदी, नेपाल के बिना राम भी अधूरे

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने दो दिवसीय नेपाल दौरे पर जनकपुर पहुंचे है इस दौरान यहां उन्होंनेएक जन्सबः को भी सम्बोधित किया मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत ‘जय सिया राम’ कहकर की. यहां प्रधानमंत्री का स्वागत यहां 121 किलो की फूलमाला पहनाकर किया गया. 

संबोधन के दौरान मोदी ने कहा कि एकादशी के दिन जनकपुर में मां जानकी के चरणों में आना मेरा सौभाग्य है। हम नेपाल के साथ रिश्तों को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नेपाल दोनों देशों के बीच ‘रामायण’ सर्किट बनाने की दिशा में काम करेंगे. यह दोनों देशों के बीच लोगों से संपर्क करने के लिए मजबूत लोगों के लिए आधार के रूप में कार्य करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने जानकी मंदिर की विजिटर बुक में अपने विचार लिखे।

2014 में जब मैं प्रधानमंत्री के तौर पर पहली बार नेपाल आया था, तो संविधान सभा में कहा था कि जल्द ही जनकपुर आउंगा। मैं आप सबसे क्षमा चाहता हूं, मुझे आने में थोड़ी देर हो गई। आज जानकी मंदिर में दर्शन कर, मेरी बहुत सालों की मनोकामना पूरी हुई।भारत और नेपाल दो देश हैं, लेकिन हमारी मित्रता आज की नहीं त्रेता युग की है। राजा जनक और राजा दशरथ ने सिर्फ़ जनकपुर और अयोध्या ही नहीं, भारत और नेपाल को भी मित्रता और साझेदारी के बंधन में बांध दिया था।ये बंधन है राम-सीता का। बुद्ध का, महावीर का। यही बंधन रामेश्वरम् में रहने वाले को खींच कर पशुपतिनाथ ले आता है। यही बंधन लुम्बिनी में रहने वाले को बोधगया ले जाता है। और यही बंधन, यही आस्था, यही स्नेह, आज मुझे जनकपुर ले आया है। ये मां जानकी का धाम है, जिसके बिना अयोध्या अधूरी है आपकी धर्मनिष्ठा सागर से गहरी है और आपका स्वाभिमान सागरमाथा से ऊंचा है। जैसे मिथिला की तुलसी भारत के आंगन में पावनता, शुचिता और मर्यादा की सुगंध फैलाती है वैसे ही नेपाल से भारत की आत्मीयता इस संपूर्ण क्षेत्र को शांति, सुरक्षा और संस्कार की त्रिवेणी से सींचती है।

मिथिला की संस्कृति और साहित्य, मिथिला की लोक कला, मिथिला का स्वागत सम्मान सब अद्भुत है। पूरी दुनिया में मिथिला संस्कृति का स्थान बहुत ऊपर है।ये वो धरती है जिसने दिखाया कि बेटी को किस प्रकार सम्मान दिया जाता है। बेटियों के सम्मान की ये सीख आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है जनक की नगरी, सीता माता के कारण स्त्री- चेतना की गंगोत्री बनी है। सीता माता यानि त्याग , तपस्या ,समर्पण और संघर्ष की मूर्ति।यहां की मिथिला Paintings को ही लीजिए। इस परंपरा को आगे बढ़ाने में अत्यधिक योगदान महिलाओं का ही रहा है। और मिथिला की यही कला, आज पूरे विश्व में प्रसिद्द हैं। इस कला में भी हमें प्रकृति की, पर्यावरण की चेतना देखने को मिलती है।राजा जनक और जनकल्याण के इस संदेश को लेकर ही हम आगे बढ़ रहे हैं। आपके नेपाल और भारत के संबंध राजनीति, कूटनीति, समरनीति से परे देव-नीति से बंधे हैं। व्यक्ति और सरकारें आती-जाती रहेंगी, पर ये संबंध अजर, अमर हैं।

– मोदी ने इस दौरान भजन कीर्तन में भी हिस्सा लिया.

– जानकी मंदिर में पूजा अर्चना की पीएम मोदी ने

-जानकी मंदिर की ओर जाते हुए रास्ते में लोग भारत और नेपाल का झंडा लेकर खड़े हैं। इस बीच वहां पर लोग मोदी-मोदी, हर हर मोदी और जानकी माता की जय के नारे लगा रहे हैं।-जानकी मंदिर के लिए रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

-जनकपुर एयरपोर्ट पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हुआ भव्य स्वागत।

मोदी यहां आज जनकपुर-अयोध्या बस सर्विस को हरी झंडी दिखा दी है। इसे रामायण सर्किट के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। वैसे तो प्रधानमंत्री का यह दौरा धार्मिक बताया जा रहा है, लेकिन इसे दोनों देशों के बीच के रिश्तों की खटास के कम करने के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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