मोदी सरकार की बढ़ी टेंशन, तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची बेरोजगारी दर: CMIE

भारत में बेरोजगारी दर अक्टूबर में तीन साल के सबसे उंचे स्तर पर पहंुच गई है। ये दावा अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने अपने शोध पत्र में किया है।

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नई दिल्ली। भारत में बेरोजगारी दर अक्टूबर में तीन साल के सबसे उंचे स्तर पर पहंुच गई है। ये दावा अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने अपने शोध पत्र में किया है। शोध पत्र केे मुताबिक अक्टूबर में बेराजगारी दर 8.5 फीसदी रही है, जो अगस्त 2016 के बाद सबसे अधिक है और सितंबर 2019 में जारी किए गए आंकड़ों से भी ज्यादा है।

रोजगार मिलने की संख्या में आई गिरावट

शोध पत्र के अनुसार बीते छः सालों में सबसे कम लोगों को रोजगार मिला है। 2011-12 से 2017-18 के दौरान 90 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। वहीं देश के तीन राज्यों में स्थिति बेहद खतरनाक है। दरअसल त्रिपुरा, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में ढूंढने पर भी लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। त्रिपुरा में बेरोजगारी दर 23.3 फीसदी तक पंहुच गई है।

सीएमआईई के एमडी और सीईओ महेश व्यास ने बताया कि देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बेरोजगारी में लगातार इजाफा हो रहा है। जिसमें शहरी इलाकों में लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। ऑटो के अलावा कई सेक्टर में हालत बिगड़ने के चलते ऐसी परिस्थिति देखने को मिल रहा है। टेक्सटाइल, चाय, एफएमसीजी, रियल एस्टेट जैसे सेक्टर में भीषण मंदी आई है।

सीएमआईई ने की ओर से जारी डाटा के मुताबिक 2016 से 2018 के दौरान 1.1 करोड़ लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी। फरवरी 2019 में बेरोजगारी का आंकड़ा 7.2 फीसदी रिकाॅर्ड किया गया था। जबकि फरवरी 2018 में ये आंकड़ा 5.9 फीसदी था।

लोगों की गवानी पड़ी नौकरी

रिपोर्ट की माने तो साल 2018 में 40.6 करोड़ लोगों के पास नौकरी थी तो वहीं फरवरी 2019 में ये आंकड़ा 40 करोड़ तक पंहुच गया है। ऐसे में 2018 और 2019 के दौरान करीब 60 लाख लोग बेरोजगार हो गए।

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