कश्मीर पर पाकिस्तान के शोर के बीच नजरअंदाज हुई चीन की बैचेनी

अक्साई चिन लद्दाख के ठीक पूर्व में स्थित है। अब लद्दाख पर सीधे केंद्र सरकार का शासन होगा जो चीन के लिए परेशानी बन गया है।

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा दे दिया। कश्मीर पर मोदी सरकार के बड़े एक्शन से पाकिस्तान ने जमकर शोर मचाया लेकिन इस शोर के बीच किसी का भी चीन की बैचेनी की ओर ध्यान नहीं गया। इस मामले पर पाकिस्तान के साथ-साथ चीन के सामने भी भू-राजनीतिक चुनौतियां पेश हो गई हैं।

दरअसल, चीन का कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा है, जिसे ‘अक्साई चिन’ कहा जाता है। अक्साई चिन लद्दाख के ठीक पूर्व में स्थित है। अब लद्दाख पर सीधे केंद्र सरकार का शासन होगा जो चीन के लिए परेशानी बन गया है। भारत और भूटान दो ऐसे देश हैं जिनके साथ चीन का सीमाई विवाद आज तक अनसुलझा है।

गौरतलब है कि चीनी सेना नियमित तौर पर लद्दाख में घुसपैठ करती रहती है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जब चीन के दौरे पर पहुंचे तो चीन की घबराहट साफ दिखी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एस. जयशंकर से मुलाकात में कहा कि भारत के नए फैसले में ‘चीनी क्षेत्र’ शामिल है।

मोदी सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि इस कदम से चीन की संप्रभुता के लिए चुनौती पैदा होती है और इससे दोनों देशों के बीच सीमाई इलाके में शांति व स्थिरता कायम रखने के समझौते का भी उल्लंघन हुआ है।

इस पर जयशंकर ने चीन को आश्वस्त करते हुए कहा कि लद्दाख पर फैसले से भारत की बाहरी सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वह किसी अतिरिक्त क्षेत्रीय दावे को पेश करने की कोशिश नहीं कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लद्दाख से लेकर अक्साई चिन तक अब भारत की पकड़ मजबूत होगी लेकिन इससे भारत के लिए चीन से सीमाई विवाद सुलझाने में चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

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