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मोदी सरकार को झटका, वित्तीय घाटा घटने की बजाय बढ़ा

Posted on: 01 Jul 2019 01:24 by Pawan Yadav
मोदी सरकार को झटका, वित्तीय घाटा घटने की बजाय बढ़ा

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। देश चालू खाते का घाटा घटन के बजाय बढ़ गया है। पिछले वित्त वर्ष में देश का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर जीडीपी के 2.1 फीसदी के बराबर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक के मुताबिक 2018-19 की चैथी तिमाही में चालू खाते का घाटा घटने की बजाय बढ़ गया है। राजकोषीय घाटा भी दो महीने के तय लक्ष्य के आधा ही हो पाया है। रिजर्व बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी के मुकाबले 1.8 फीसदी यानी 48.7 अरब डॉलर रहा था, जो 2019 में बढ़कर 57.2 अरब डॉलर पहुंच गया।

हालांकि, वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च) में यह घटकर 0.7 फीसदी यानी 4.6 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर तिमाही में 2.7 फीसदी यानी 27.7 अरब डॉलर रहा था। मार्च 2018 में समाप्त तिमाही में चालू खाते का घाटा 1.8 फीसदी यानी 13 अरब डॉलर था। रिजर्व बैंक के मुताबिक 2018-19 में देश का व्यापार घाटा बढ़कर 180.3 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 160 अरब डॉलर रहा था। हालांकि, मार्च तिमाही में व्यापार घाटा 35.2 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 41.6 अरब डॉलर था।

इस दौरान वास्तविक विदेशी निवेश में 2.4 अरब डॉलर की गिरावट रही, जो पिछले साल 22.1 अरब डॉलर थी। 2019-20 के पहले दो महीने अप्रैल-मई में सरकार को बजटीय अनुमान के 7.3 फीसदी के बराबर राजस्व की प्राप्ति हुई। वहीं, पूंजी व्यय बजटीय अनुमान का 14.2 फीसदी रहा। सरकार का कुल व्यय पहले दो महीनों में 5.12 लाख करोड़ रुपए रहा, जो बजटीय अनुमान का 18.4 फीसदी है। सरकार ने इस साल राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 3.4 फीसदी रखा है।

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