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स्वामी उवाच मोदी नहीं बन सकते पीएम, गडकरी विकल्प | Modi cannot be PM, Nitin Gadkari in Option…

Posted on: 04 May 2019 12:33 by rubi panchal
स्वामी उवाच मोदी नहीं बन सकते पीएम, गडकरी विकल्प | Modi cannot be PM, Nitin Gadkari in Option…

कभी जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे ठेठ दक्षिण भारत के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की छवि खरा-खरा बोलने वाले की रही है। फिर वह मोदी सरकार की नीतियां हों या खुद मोदी। बीते पांच सालों के मोदी युग में अपनी राय खुलकर रखने वालों में स्वामी संभवतः इकलौते राजनेता है। हिंदूवादी छवि के इस नेता की आर्थिक मामलों पर गहरी पकड़ है। इसके चलते कोर्ट के माध्यम से अनेक घोटाले वे उजागर करते रहे हैं।

राम मंदिर जल्द बने इसके भी अदालती प्रयास उन्होंने किए हैं। बहरहाल, उनका ताजा आकलन और बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी प्रशंसक मंडली को संकट में डालने के लिए पर्याप्त है। जब सट्टा बाजार और सत्ता से प्रभावित ढेरों सर्वे मोदी और उनकी एनडीए मंडली के लिए पौने तीन सौ सीटों यानी स्पष्ट बहुमत का आकलन कर रहे हैं, वहीं स्वामी का आकलन है भाजपा 220 या 230 सीटों से आगे नहीं जाएगी।

उसके सहयोगी एनडीए के दलों का आंकड़ा भी 30 तक पहुंचेगा। इसके बाद भी बहुमत से दूर ही रहेंगे। बकाया सीटों के लिए मोदी के नाम पर समर्थन मिलना मुश्किल होगा। वैसे समर्थन तो ओडिशा के बीजू जनता दल नेता नवीन पटनायक से भी लिया जा सकता है, लेकिन वे कह चुके हैं मोदी प्रधानमंत्री नहीं होंगे। यानी किसी और नाम पर वे समर्थन कर सकते हैं। यही स्थिति बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती की है। वे हालांकि महागठबंधन के नाम पर भाजपा के खिलाफ ही चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन मोदी के बगैर उनका समर्थन लिया जा सकता है।

इन दोनों नेताओं की तरह ही अन्य दल भी मोदी को स्वीकार नहीं करेंगे। लिहाजा बहुमत के लिए जरूरी 30 से 40 सीटों के इंतजाम के लिए भाजपा को ही नया नेता चुनना होगा। तब नए सहयोगी दल एनडीए को मिल सकते हैं। बकौल स्वामी इन स्थितियों में नितिन गडकरी ही प्रधानमंत्री पद के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वे इसके पात्र भी हैं औऱ अच्छे व्यक्ति हैं। चलते चुनाव में स्वामी का यह आकलन भाजपा को कितनी राहत देगा या आहत ही करेगा इसका अंदाजा तो चुनाव के नतीजे आने के बाद ही लगाया जा सकेगा। इतना जरूर है कि स्वामी के दीर्घ अनुभव औऱ सटीक आकलन को चुनौती देना जरा मुश्किल है। धारा के विपरीत राजनीति करने के कारण वे बहुत ही सतर्क होकर कोई बात कहते हैं। उन्हें पता होता है कि उनकी बात दूर तक जाएगी और गलत हुई तो कहर बरपाएगी।

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