कर्नाटक चुनाव में मोदी और राहुल रहे इतने असरदार ?

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#कर्नाटक_किसका

कर्नाटक के नतीजों का हर कोई एक पांव पर खड़ा हो कर इतंजार कर रहा है. कुछ ही घंटों बाद कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री घोषित हो जाएगा. बस कुछ ही पलों में यह बात सामने आ जाएगी कि कर्नाटक के किले पर कांग्रेस का कब्जा ही बरकरार रहता है या 5 साल बाद फिर बीजेपी की इस दक्षिणी राज्य की सत्ता में धमक के साथ वापसी होती है. और अगर दोनों ही मुख्यपार्टी बहुमत के जादुई आंकडें को छू नहीं पाते हैं तो ऐसी स्थिति में देवगोड़ा के पाले में गेंद आ जाएगी. इस चुनाव में मोदी और राहुल दोनों ने ही अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. आइये जानते हैं किसका रहा कितना असर.

राहुल गांधी 

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कर्नाटक चुनाव राहुल गांधी के लिए काफी ख़ास है. क्योंकि इस बार भी नाकामी हाथ लगी तो पार्टी को कई जवाब देना होंगे. यह बात राहुल गांधी भी जानते हैं और उन्होंने कर्नाटक में मठ से ले कर मंदिर तक हर जगह माथा टिका लिया है. सिर्फ यही नहीं पेट्रोल उत्पादों के ऊंचे दामों का विरोध करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को कर्नाटक के कोलार जिले में साइकिल चलाकर विरोध मार्च की अगुवाई की. बाद में उन्होंने बैलगाड़ी पर खड़े होकर वहां एकत्रित लोगों को संबोधित भी किया. उन्होंने एक सभा में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनमें ‘खतरा’ दिखाई देता है और प्रधानमंत्री बनने की उनकी मंशा जाहिर करने के बाद मोदी का उन पर हमला सिर्फ लोगों का ध्यान भटकाने का तरीका है. कर्नाटक चुनाव में राहु७ल गांधी काफी सक्रीय रहे हैं. ऐसे में यह नतीजे उनके लिए काफी उपयोगी है.

नरेंद्र मोदी 

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मोदी की रैलियों और भाषणों का असर मतदाता पर किस तरह होता है, इस बात का अंदेशा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले मोदी कि रैली ने कांग्रेस को पसीने ला दिए थे. माना जा रहा है रैली का कांग्रेस की चुनाव रणनीति पर असर देखने को मिल सकता है. बता दें राज्य के इस तटीय जिले पर कब्जा कायम रखने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. मगर कांग्रेस के उम्मीदवारों का मानना है कि मोदी की यह रैली मतदाताओं का रूझान भाजपा की ओर कर सकती है. अगर बीजेपी कर्नाटक हारती है तो इसका असर आने वाले प्रदेश चुनाओं पर भी पड़ेगा.

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