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मिर्जा गालिब गजलों के पर्याय बन गए थे

Posted on: 31 Oct 2018 08:44 by Mohit Devkar
मिर्जा गालिब गजलों के पर्याय बन गए थे

अर्जुन राठौर

आज देश की प्रसिद्ध शायर मिर्जा गालिब की 220 वीं जन्म तिथि है मिर्जा साहब को आज पूरा देश याद करेगा ।

गजलों के पर्याय बन गए मिर्जा साहब ने गजलों की दुनिया में जो अपना योगदान दिया उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है ।

मिर्जा गालिब की गजलों की सबसे बड़ी विशेषता यही रही वे जन जन तक पहुंची और आज भी उनकी कई गजलें लोगों के जहन में उतरी हुई है ।

मिर्जा साहब की एक ग़ज़ल यहां पर प्रस्तुत है जो जीवन के बारे में गहरा संदेश देती है

कुछ प्यारी लाइने मिर्जा ग़ालिब की..

ख़ुदा की मोहब्बत को फ़ना कौन करेगा?
خُدا کی مہبت کو فنا کون کریگا؟
सभी बन्दे नेक हों तो गुनाह कौन करेगा?
سبھی بندے نئک ہوں تو گناہ کون کریگا؟
ऐ ख़ुदा मेरे दोस्तों को सलामत रखना
اے خُدا میرے دوستوں کو سلامت رکھنا
वरना मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा
ور نہ میری سلامتی کی دُعا کون کریگا
और रखना मेरे दुश्मनों को भी महफूज़
اور رکھنا میرے دُشمنوں کو بہی مہفوذ
वरना मेरी तेरे पास आने की दुआ कौन करेगा…!!!
ورنہ میری تیرے پاس آنے کی دُعا کون
کریگا۔۔۔۔!!!

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