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व्यापार, राजनीति और समाज सेवा में महारत हांसिल है मनोज काला को

Posted on: 22 Jun 2018 11:31 by Praveen Rathore
व्यापार, राजनीति और समाज सेवा में महारत हांसिल है मनोज काला को

इंदौर। म.प्र. कृषि विपणन संघ भोपाल के सदस्य, इंदौर अनाज तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष, व्यापारिक औद्योगिक सहकारी बैंक लि. के डायरेक्टर, जैन समाज के सोशल ग्रुप मेंबर और दिगंबर जैन समाज में ट्रस्टी मनोज काला बचपन से ही आरएसएस विचारधारा से प्रभावित रहे। वे पांच साल की उम्र से संघ की शाखाओं में जा रहे हैं। व्यापार के साथ-साथ राजनीति, समाजसेवा और दोस्तों की मदद के लिए आज भी वे सदैव तैयार रहते हैं। घमासान डॉटकॉम ने उनसे बातचीत की।

सवाल : व्यापार, राजनीति और समाजसेवा में आप सक्रिय हैं, कैसे समन्वय बिठाते हैं?
जवाब : इंसान यदि मन में ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं है। व्यापार मेरा पुश्तैनी है, चूंकि बचपन से आरएसएस की शाखा में जा रहा हूं तो पढ़ाई के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए काम किया। फिर छात्रसंघ चुनाव भी लड़ा। पार्षद के रूप में पांच साल सेवा की।

सवाल : राजनीति में कैसे आए?
जवाब : पांच साल की उम्र से संघ की शाखा में जाता रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद राजनीति में सक्रिय हुआ। चूंकि बचपन से संघ परिवार से जुड़ा रहा, इसलिए भाजपा के प्रति समर्पित रहा। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान अभा विद्यार्थी परिषद में काम किया, फिर भाजपा में कार्यकर्ता की हैसियत से कार्य करते-करते पार्टी ने मुझे मल्हारगंज (गोराकुंड) क्षेत्र से नगर निगम चुनाव का टिकट दिया। चूंकि बचपन इसी क्षेत्र में बीता था और क्षेत्रवासियों का स्नेह रहा तो मैं चुनाव जीत गया। 1995 से 2000 तक क्षेत्र का पार्षद की हैसियत से प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्र की जनसमस्याओं का निराकरण करवाया।

सवाल : आप मंडी व्यापारियों की समस्याएं भी उठाते रहे हैं?
जवाब : चूंकि मेरा आकर्षण राजनीति में हमेशा ही रहा है, इसलिए व्यापार में समय निकाल कर मंडी व्यापारियों की शासन व मंडी बोर्ड में आने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए आंदोलनों का नेतृत्व करता रहा। कृषि उपज व्यापारी संघ (कच्ची मंडी, छावनी) में भी कई साल पदाधिकारी रहा। इसके बाद इंदौर अनाज दलहन, तिलहन व्यापारी संघ का अध्यक्ष, व्यापारिक औद्योगिक सहकारी बैंक का डायरेक्टर और जैन समाज में ट्रस्टी रहा।

सवाल : आपका मूल व्यवसाय क्या है?
जवाब : दरअसल मैं पुश्तैनी व्यापार को ही आगे बढ़ा रहा हूं। मेरे पिताजी विमलचंदजी ने 50 साल पहले अनाज का कारोबार शुरू किया था। मैं और मेरा भाई विजय काला दोनों ही इस व्यापार में संलग्न हैं। अब तीसरी पीढ़ी यानि मेरे बच्चे यश और आयुष भी पुश्तैनी व्यापार ही कर रहे हैं।

सवाल : आपकी हॉबी क्या है?
जवाब : क्रिकेट खेलना, मूवी देखना और समाजसेवा के साथ जरुरतमंद लोगों और दोस्तों की मदद करना। दूसरों की परेशानी में किसी के काम आ जाएं, तो मन को शांति मिलती है।

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