Breaking News

ये फैसला ठीक नहीं हुआ कमलनाथजी!

Posted on: 09 Jan 2019 08:12 by Pawan Yadav
ये फैसला ठीक नहीं हुआ कमलनाथजी!

हेमंत शर्मा
अब तो खैर मनीष सिंह उज्जैन कलेक्टर पद से हटकर मंत्रालय के किसी कक्ष में भेज दिए गए हैं, लेकिन सरकार के इस फैसले ने उन सारे अधिकारियों को ‘बैकफुट’ पर भेज दिया है, जो आगे बढ़कर अपने काम करने के तरीके से उस पद की गरिमा को इतनी ऊंचाई पर ले जाते थे कि न सिर्फ राजनैतिक दलों के लोगों को ही नहीं बल्कि ब्यूरोक्रेसी को भी अपनी नाक घुसाने में परेशानी होती थी। उज्जैन जैसे शहर को चुनावों के दौरान गुंडामुक्त करने की उनकी मुहिम से सत्ता और विपक्ष दोनों नाराज़ थे, महाकाल परिसर को धंधेबाज़ पंडों और भ्रष्ट बिचौलियों से मुक्ति दिलाने से सारे अहंत-महंत दुखी थे और इन सबसे भी ज्यादा- सरकारी तंत्र में बैठे हर किस्म के दलाल इस प्रमोटी आईएएस अफसर के नाम से बेहद असहज हो जाते थे।

मनीष सिंह को उज्जैन से ज्यादा इंदौर के लिए जाना जाता है। एक गंदे शहर के तमगे से इंदौर को मुक्ति दिलाने का काम मनीष सिंह और मेयर मालिनी गौड़ ने मिल-जुलकर किया था। इंदौर नगर निगम जैसी भ्रष्ट मानी जाने वाली संस्था में, जहां आप कुछ न करें तो भी हर महीने लाखों रुपए निगम कमिश्नर के तौर पर कमा सकते हैं, ऐसे नगर निगम में मनीष सिंह महीनों तक 18-20 घंटे काम करते रहे और एक बार नहीं, बल्कि दो बार इंदौर को देश के ‘सबसे स्वच्छ शहर’ में शुमार करवाते रहे। इस बीच, जब सिंहस्थ की तैयारियां शुरू हुई तो निगम कमिश्नर रहते हुए भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उन्हें सिंहस्थ की तैयारियों का जिम्मा सौंपा था। तब भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे उज्जैन के सिंहस्थ के कर्ता-धर्ता इतने असहज हो गए थे कि महाकाल से प्रार्थनाओं में खुद से ज्यादा मनीष सिंह का नाम लिया करते थे। मनीष सिंह ने तब किसी भी बिल को एप्रूव करने से मना कर दिया था। अब अगर वाकई कांग्रेस सरकार घपले क्या होते हैं और कैसे होते हैं – देखना चाहती है तो उसे उन सारे खर्चों की जांच का आदेश देना चाहिए। ऐसे कई आईएएस बेनकाब होंगे जो पिछले कई सालों में किसी राजनैतिक पार्टी के एजेंट के रूप में भी काम कर रहे थे।

manish-singh

दोहरी जिम्मेदारियां मिलना जैसे मनीष सिंह के पोर्टफोलियो में ही शामिल था। नगर निगम गए तब भी ग्लोबल समिट की जिम्मदारी उन्हें मिली। ऐसा लगता था कि वह अपने काम को, जिम्मेदारी से ज्यादा धर्म समझने लगे हैं और यह उनकी नियति बन चुका है। इंदौर के दोनों बड़े मंदिरों, खजराना गणेश और रणजीत हनुमान को धंधेबाजों से मुक्त करवाकर वहां एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लागू की थी, जिसका श्रेय आज भी ऐसे हजारों लोग मनीष सिंह को ही देते हैं, जो शायद उन्हें जानते तक न हों। इंदौर के सफाईकर्मियों को रात में झाड़ू उठा लेने के लिए तैयार करना कितना मुश्किल काम था, शहर के कांग्रेसी नेताओं के दिल पर हाथ रखकर पूछेंगे तो उनका भी जवाब वही आएगा, जो भाजपा नेताओं का आता है। और भाजपा की बात करें तो दस-बीस प्रतिशत को छोड़ दीजिए, इनका भी हर नेता चाहता था कब मनीष सिंह जाएं और कब पचास हजार से कम के बिल फिर मंजूर करवाना शुरू करें।

इसलिए जब मनीष सिंह को उज्जैन कलेक्टर पद से सिर्फ इसलिए हटाया गया कि शनिश्चरी अमावस्या पर नर्मदा का पानी शिप्रा में उज्जैन ले जाने की जिम्मेदारी एनवीडीए के अधिकारियों ने ठीक से नहीं निभाई और 50 हजार लोगों को नदी किनारे लगाए गए नलों के पानी से स्नान कर अपने पुरखों को तर्पण करना पड़ा तो उन सैकड़ों दलालों, भ्रष्ट अधिकारियों और मूर्ख राजनीतिज्ञों को लगा जैसे यह मौका फिर नहीं आएगा। उन्हें लगा कि पता नहीं, प्रशासनिक पैनी नज़र रखने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ कब मनीष सिंह से प्रभावित हो जाएं। इससे बेहतर है कि पूरी ताकत, संसाधन, जोड़-तोड़, जुगाड़ और संबंधों की दुहाई लगाकर इस अधिकारी को यहीं ‘शहीद’ कर दो। पता नहीं, मुख्यमंत्रीजी को मनीष सिंह के बारे में क्या जानकारी दी गई, मुख्य
सचिव सुधिरंजन मोहंती को किसने यह बताया कि दोषी कलेक्टर है। वैसे सवाल यह भी है कि क्या वाकई इस तरह की घटनाओं में कमिश्नर
की कोई भूमिका होती है? या उन्हें सिर्फ इसलिए हटा दिया गया ताकि यह न लगे कि ‘शिकार’ सिर्फ मनीष सिंह ही थे?

राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचे एक अधिकारी का ईमानदार होना या अपने काम को लेकर इतना ‘प्रो-एक्टिव’ होना आजकल कम ही देखने को मिलता है। कमलनाथजी, ऐसी दुर्लभ पौध को बचाने का काम आप जैसा दूरदर्शी मुख्यमंत्री ही कर सकता था, लेकिन लगता है यहां यह फैसला ठीक नहीं हुआ। एनवीडीए के वे नकारा इंजीनियर अब भी मजे में हैं, उज्जैन को हो सकता है शशांक मिश्रा के रूप में और बेहतर कलेक्टर मिल जाए, लेकिन यकीन मानिए मनीष सिंह एक ही है। मुख्यमंत्रीजी, मनीष सिंह को हटाने से भले ही आपकी पार्टी के नेताओं का अहंकार और ऊंचा हो जाए लेकिन प्रदेश की जनता के ज़ेहन में आपका कद हजारों फीट ऊंचा हो सकता है जब आप ऐसे कई मनीष सिंह प्रदेशभर में खड़े कर दें। लेकिन इसके लिए सबसे पहले एक मनीष सिंह की पीठ पर हाथ रखना होगा..!

Read More : मप्र : दिग्गी का आरोप- बीजेपी ने सरकार गिराने के लिए दिया 100 करोड़ का लालच

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com