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महाप्रभु, चेहरे के इस तनाव को उतार फेंकिए ना! कीर्ति राणा की कलम से….

Posted on: 25 Jun 2018 13:58 by krishnpal rathore
महाप्रभु, चेहरे के इस तनाव को उतार फेंकिए ना! कीर्ति राणा की कलम से….

अभी विश्व योग दिवस पर मैंने भी #योग किया। मेरे लिए भी इन चार वर्षों में योग दिवस इसलिए गर्व दिवस हो गया है कि अपने पीएमजी की वजह से योग ‘इंटरनेशनल योगा डे’ हुआ है।दो दिन बाद तो पीएमजी को नज़दीक से देखने का मौक़ा भी मिल गया। इससे पहले टीवी पर, आम सभाओं में भी उनकी बॉडी लैग्वेज देखी। इन चार सालों में रत्ती भर भी फ़र्क नजर नहीं आया।पता नहीं पीएमजी को क्या टेंशन खाए जा रहा है, चार लोगों के बीच सौम्य मुद्रा में कभी नजर ही नहीं आते। जब देखा चेहरे के हर कोण से सख्ती ही टपकती नजर आती है।उनकी यह स्थायी मुख मुद्रा देखते हुए सोचता रहता हूँ क्या ग़म है जो तुम छुपा रहे हो।असंख्य भारतीयों का प्रेरणापुरूष बने योगी #नरेंद्रमोदी का यह तना हुआ चेहरा योग के प्रभाव वाली बातों से तो मेल नहीं खाता। पता नहीं उनके प्रोटोकॉल में हास्यमुद्रा शामिल है या नहीं या इसलिए हा..हा..हा कर के ठहाके ना लगाते हों कि लोग क्या कहेंगे।अपन ने तो सात दिन ही शिविर अटैंड किया लेकिन सिखाने वाले ट्रेनर अनिता-विवेक शर्मा रोज दोहराते थे कि योग से सारे तनाव दूर हो जाते हैं, चेहरा खिला खिला, प्रफुल्लित रहता है।योग से खुश आदमी के लिए इमेज परिणाम

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मुझे तो लगता है अपने मंत्रिमंडल के साथियों, मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों के लिए पीएमजी सख्तमिजाजी दर्शाता ये कठोर चेहरा बनाकर रहते हैं। शायद चेहरे की इस बेरुख़ी का ही कमाल है कि देश दौड़ रहा है वरना तो एक वो घिघियाता-चुप्पी का कंबल ओढ़े मौन चेहरा, न दस साल में कुछ कर पाया ना उनके पहले के पीएम कुछ कर पाए। पीएमजी जब सोलह गाँवों के #हितग्राहियों की बातों पर मुस्कुराए तो ऐसा लगा बुद्ध मुस्कुराए।पीएमजी की दिनचर्या-दौरे मुताबिक पहनावा निर्धारित करने वाले सलाहकार मंडल को पीएमजी को यह सलाह भी देना चाहिए कि जैसे विदेशों में वैश्विक छवि निखारने के लिए आप मुस्कुराते-ठहाके लगाते नजर आते हैं तो भारत में भी मुस्कुराया कीजिए। शायद यह तनाव हो सकता है कि 1460 दिन में एक दिन की भी छुट्टी न लेने, अखंड ज्योत की तरह अनवरत काम करते रहने से शारीरिक थकान ही चेहरे पर तनाव बन कर चिपक गई हो। पर ऐसा होता तो #मोटाभाई सहित #कमलदल के चेहरों पर भी तनाव होना था । ये लोग तो यह याद दिलाने का कोई मौक़ा ही नहीं छोड़ते कि प्रधानमंत्री जी ने आज तक एक छुट्टी नहीं ली है।पहले तो #अख़बारों में ओवरटाइम और छुट्टी वाले दिन काम करने का अतिरिक्त पैसा भी मिल जाता था, श्रम नियमों के बढ़ते दबाव से सारी सुविधाएँ बंद सी होती जा रही है। यह पता लगाना पड़ेगा कि देश हित में अनवरत काम करते रहने वाले, विश्वभ्रमण में पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों के रेकार्ड ध्वस्त करने वाले पीएमजी को लीव केश करने जैसी सुविधा भी मिलती है या नहीं। सुबह चाय एक देश में, दोपहर का भोजन दूसरे और रात का खाना तीसरे देश में और विमान में झपकी लेने वाले पीएमजी को कहाँ एक पल की फ़ुर्सत मिल पाती है कि उन देशों में सैरसपाटा-शॉपिंग आदि कर सके।और ये सब करें भी तो किस के लिए, बाल बच्चे तो हैं नहीं। वो तो अच्छा हुआ कि #जसोदाबेन ने तत्काल उद्घोष कर दिया कि मोदी मेरे राम वरना तो #आनंदीबेन की बात पर ही लोग भरोसा करने लगते।

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पीएमजी की इस यात्रा में उनकी बॉडी लैंग्वेज के साथ दूसरी जो बात नोट करने लायक थी वह यह कि स्वागत में एक फूल स्वीकारने लगे हैं।बाक़ी नेताओं को भी यह संदेश जल्दी समझ आ जाना चाहिए वरना तो जितना बड़ा वीआईपी, उतना बड़ा गुलदस्ता भी फर्जी बिलों का कारण रहा है। शायद ऐसी छोटी छोटी पहल से ही देश #कांग्रेस कल्चर से मुक्त होगा।दिल्ली दरबार को पता नहीं होगा कि डेढ़ दशक शासन के बाद भी मप्र में सरकारी मानसिकता कांग्रेस कल्चर से मुक्त नहीं हो पाई है। भीड़ जुटाने के लिए स्कूलों-कॉलेजों के स्टूडेंट्स पहले भी लाए जाते थे।गांवों से भीड़ लाने, बसें जुटाने के महामंत्र का जाप अब भी चल रहा है।जिन लोगों ने #अटलजी को सुना है वे जानते हैं कि उनकी सभा के लिए पीले चांवल नहीं बाँटने पड़ते थे, विरोधी दलों के नेता भी आदर भाव से उन्हें सुनने जाते थे, चुम्बक की तरह भीड़ खिंची आती थी।चार सालों में ऐसा क्या हुआ कि बसें दौड़ाना पड़ रही हैं, विधायकों से लेकर पार्षद-पंचों तक को टारगेट पूरा करने के लिए पसीने छूट गए, कलेक्टर-एसडीएम, पटवारी भीड़ के लिए भिड़े रहे। स्कूलों के प्राचार्यों को पचास-पचास स्टूडेंट्स भेजने के लिए अवकाश घोषित करना पड़ा। पीएमजी के दौरे से परेशान हुए लोग इस कांग्रेस कल्चर को खत्म करने की उम्मीद #राहुलगांधी से ही करें क्या।राहुलगांधी के लिए इमेज परिणाम

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पीएमजी विदेशों में भारत की अच्छी बातें सिखा कर आते हैं ।वहाँ के राष्ट्राध्यक्षों को अपने देश की मार्केटिंग करना ही नहीं आती। किसी ने पीएमजी को बताया ही नहीं कि हमारे यहाँ न तो भीड़ जुटाते हैं ना ही वीआयपी के साथ कारों का क़ाफ़िला चलता है और न ही ट्रैफिक रोके जाने से लोग घंटों परेशान होते हैं।वो जाने कौन से देश हैं जहाँ के प्रधानमंत्री साइकल से आते जाते हैं। राष्ट्रपति बिना सरकारी लवाजमे के पत्नी-बच्चों के साथ आमजन की तरह शॉपिंग करने चले जाते हैं।शायद इन देशों का टूर प्रोग्राम फाइनल होना बाक़ी है। कांग्रेस तो सत्तर सालों में ऐसा उदाहरण पेश कर नहीं पाई, बहुत संभव है कि शेष बचे एक साल में चमत्कार कर दिखाएँ, नहीं तो अगले पाँच वर्ष के एजेंडे में शायद इन सुधारों को भी शामिल कर लिया जाए।महाप्रभु, चेहरे के ये निर्विकार-निर्लिप्त भाव उस छलिया कृष्ण कन्हैया लाल के लिए ही छोड़ दीजिए अपन तो राम भक्त हैं। वो मर्यादा पुरुषोत्तम तो वनगमन के लिए भी मुस्कुराते हुए गए थे।चार साल पहले किए #मंदिरनिर्माण के वादे को याद करते हुए ही मुस्कान बिखेरना शुरु कर दीजिए ना।

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