महामृत्युंजय मंत्र के है वैज्ञानिक मायनों में भी महत्व, बरतनी होगी यह सावधानी

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Shiva temple

महामृत्युंजय मंत्र का महत्व को शायद ही कोई हो जो ना जानता हो लेकिन क्या आप जानते है कि इसके सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक मायनों में भी काफी महत्व है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र को मोक्ष प्राप्ति के लिए काफी महत्व दिया गया है। कहा जाता है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति होती है कि यह मृत्यु दोष को भी दूर करता है। भविष्य पुराण यह बताया गया है कि महामृत्युंजय मंत्र का रोज जाप करने से उस व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और लम्बी उम्र मिलती है।

भगवान शिव को शास्त्रों में मृत्यु का देवता भी कहा जाता है। इसलिए महामृत्युंजय मंत्र यानी मृत्यु पर विजय का मंत्र कहा जाता है। अगर स्वर विज्ञान के हिसाब से देखा जाए तो महामृत्युंजय मंत्र के अक्षरों का स्वर के साथ उच्चारण किया जाए तो शरीर में जो कंपन होता है, वो हमारे शरीर की नाड़ियों को शुद्ध करने और तेज करने में मदद करता है। इस कंपन से हमारे शरीर में मौजूद सप्तचक्रों के आसपास एनर्जी का संचार होता है। इन चक्रों के कंपन से शरीर में शक्ति आती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस तरह लंबे स्वर और गहरी सांस के साथ जाप करने से बीमारियों से जल्दी मुक्ति मिलती है।

महामृत्युंजय मंत्र के महत्व

1- अगर आपकी कुंडली में किसी भी तरह से मास, गोचर, अंतर्दशा या अन्य कोई परेशानी है तो यह मंत्र बहुत मददगार साबित होता है। इस मंत्र के रोजाना जाप करने से आपकी सभी परेशानियां दूर हो जाती है।

2- अगर आप किसी भी रोग या बीमारी से ग्रसित हैं तो रोज इसका जाप करना शुरू कर दें, इससे आपको लाभ मिलेगा।

3- इस मंत्र का जप करने से किसी भी तरह की महामारी से बचा जा सकता है साथ ही यह मंत्र पारिवारिक कलह, संपत्ति विवाद से भी बचाता है।

4- अगर आप किसी तरह की धन संबंधी परेशानी से जूझ रहें है या आपके व्यापार में घाटा हो रहा है तो इस मंत्र का जप करना आपको काफी लाभ पहुंचाने वाला है।

5- इस मंत्र में आरोग्यकर शक्तियां है जिसके जप से ऐसी ध्वनियां उत्पन होती हैं जो आपको मृत्यु के भय से मुक्त कर देता है, इसीलिए इसे मोक्ष मंत्र भी कहा जाता है।

6- यदि आपकी कुंडली में किसी भी तरह से मृत्यु दोष या मारकेश है तो इस मंत्र का जाप करें। इससे अकाल मृत्यु दोष टल जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र के लाभ का फायदा उठाने के लिए आपको कुछ मामूली सी सावधानियों का भी ध्यान रखना होता है। जो कि निम्न है।

1- इस मंत्र का जाप करने से पहले आपके मन और तन दोनों को शुद्ध करें। उसके बाद ही मंत्र का उच्चारण करें।

2- मंत्र का जप एक निश्चित संख्या में ही करें। पूर्व दिवस में जपे गए मंत्रों से, आगामी दिनों में कम मंत्रों का जप न करें। यदि चाहें तो अधिक जप सकते हैं।

3- मंत्र का उच्चारण होठों से बाहर नहीं आना चाहिए। यदि अभ्यास न हो तो धीमे स्वर में जप करें।

4- जब भी आप मंत्र का जप करें ध्यान रहे उस दौरान धूप-दीप जलते रहना चाहिए। इस मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला पर ही करें।

5- जपकाल में ध्यान पूरी तरह मंत्र में ही रहना चाहिए, मन को इधर-उधर न भटकाएं। जपकाल में आलस्य व उबासी को न आने दें।

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