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भगवान Shivji से सीखें लाइफ मैनेजमेंट फंडे

Posted on: 04 Mar 2019 17:07 by Ravindra Singh Rana
भगवान Shivji से सीखें लाइफ मैनेजमेंट फंडे

देशभर में Maha Shivratri  का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। कई वर्षों के बाद ऐसा संयोग बना की महाशिवरात्रि सोमवार को आई है। इस पावन पर्व पर भगवान शिव के मंदिरों में भक्तों की सुबह से कतारे लगी है।

हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान शिव पार्वती जी से शादी करते है। इसी लिए इस दिन खास माना जाता है। व्यवाहिक जीवन में खुशियां और संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की पूजा, आराधना की जाती है। भगवान शिव अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते है।

महाशिवरात्रि पर्व पर शिवजी से प्रेरणा ली जाए तो जीवन में परेशानियां दूर हो जाएंगी। इसके अलावा भगवान शिव के स्वरूप से हमे बहुत कुछ सीखना चाहिए। भगवान शिव के रुप में लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र भी हैं, जिन्हें हम जीवन में अपनाकर हर समस्या से छुटकारा पा सकते है।

पॉवर ऑफ यूनिटी
जिस तरह भगवान शिव ने गंगा को धारण किया है, बिखरे हुए केशों को एकत्र करके शिव ने गंगा के विकराल रूप को शांत स्वरूप में परिवर्तित कर दिया। इससे हम यह सिखते है कि किस तरह हम अपने गुणों से दूसरों के साथ एकजुटता बनाए रख सकते है।

ब्रॉड विजन

शिव त्रिनेत्रधारी हैं। षिव के तीसरे नेत्र से हम सिखते है कि किसी भी परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ बाहरी नेत्रों का प्रयोग न करें, बल्कि सोच-समझकर निर्णय लें। और हमेषा भविष्य के परिणामों पर अपनी नजर रखें।

पेशंस

शिव चंद्रमा को अपने षिष पर धारण कर जिवन में चंद्रमा की तरह शीतलता और शांति बनाए रखने की सिख देते है। परिस्थिति चाहे जो हो आप अपना धीरज बिलकुल ना खोएं और मन पर नियंत्रण बनाए रखें।

एक्सप्रेशन

शिव ने विष का भी भी सेवन किया है जिससे उन्हे नीलकंठी भी कहा जाता है, मनुष्य का क्रोध विष के समान है। क्रोध सदैव बुद्धि को भ्रमित कर खुद को और अन्य लोगों को परेशानी में डालने वाला माना गया है। ऐसे में विष रुपी क्रोध को पीकर अपने धैर्य से उसे खत्म करें।

इन्वायरमेंटल

अगर हम भोलेनाथ के आसपास का वातावरण देखे तो हमे तुरंत उनके गले लपेटे हुऐ सांप, नंदी की सवारी, उनका पर्वत पर रहना हैं और भोजन में 56 भोग न लेकर कंदमूल लेना आदि देख सकते है। उनके भक्तों में तमाम पशु पक्षी, देव दानव सभी शामिल हैं। उनका यह स्वरूप पर्यावरण के प्रति उनके प्रेम को दिखाता हैं। उसी तरह हमे भी अपने पर्यावरण के प्रति प्रेम रखना चाहिए।

फैंटेसी

शिव संपूर्ण है फिर भी षिव को सौंदर्य का कोई मोह नही है। वह कपर्दी और कपाली हैं, अपने शरीर पर भभूत धारण करते हैं। जो यह बताती है कि संपूर्ण होने के बाद भी खुद को किसी भ्रम में न रखें। जीवन में जुनून और प्रतिबद्धता हो, किंतु किसी कल्पना में न जिएं।

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