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MP का पहला जिला होगा Indore, गरीब मरीजों के हित में अनूठी पहल

Posted on: 03 Mar 2019 16:07 by Ravindra Singh Rana
MP का पहला जिला होगा Indore, गरीब मरीजों के हित में अनूठी पहल
कीर्ति राणा
मप्र में इंदौर ऐसा पहला जिला बनने जा रहा है जहां जिला प्रशासन की पहल पर निजी अस्पताल हर महीने एक मरीज का निशुल्क उपचार करेंगे।फिर चाहे उस मरीज की विभिन्न जांच-उपचार आदि में एक लाख रुपए तक का खर्च क्यों न आए। कलेक्टर जाटव इस संबंध में निजी अस्पताल संचालकों के साथ एक बैठक कर उन्हें इस बात के लिए भी राजी करेंगे कि मरीज के निशुल्क उपचार खर्च की सीमा अधिकतम दो लाख तक वहन करें ।
कलेक्टर जाटव ने इस प्रतिनिधि से चर्चा में कहा कि मरीजों के आवेदनों का परीक्षण एक समिति  करेगी। इस समिति में प्रशासनिक अधिकारी और डॉक्टर रहेंगे।समिति जिन मरीजों का चयन करेगी उन्हें शहर के निजी अस्पतालों में रैफर किया जाएगा।हर माह एक अस्पताल एक मरीज का उपचार करेगा।एक लाख या अधिकतम दो लाख तक का उपचार खर्च निजी अस्पताल संचालक वहन करेंगे।उपचार की पात्रता उन्हीं मरीजों को मिलेगी जो नॉन बीपीएल और आयकर दाता नहीं होंगे।
यदि किसी गंभीर मरीज की हालत दो लाख के उपचार खर्च बाद भी नहीं सुधरी तो ? कलेक्टर का कहना था गंभीर बीमारी वाले ऐसे मरीज का मर्ज ठीक नहीं होता है या लंबे इलाज की जरूरत होती है तो उनके उपचार खर्च में रेडक्रॉस समिति को कैसे जोड़ा जा सकता है इस पर भी मंथन चल रहा है। फिलहाल तो अस्पताल दो लाख तक खर्च वहन करें, विभिन्न जांचों का भी न्यूनतम शुल्क लिया जाए इस पर फोकस है।

यह है प्रोजेक्ट आव्हान  

 प्रोजेक्ट आव्हान (AAVHAN-Action to Assist & Volunteer through Aid to Help & Adopt (A) Needy)अंतर्गत निजी चिकित्सालय स्वेच्छा अनुसार माह में कम से कम एक मरीज नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएंगें। निजी चिकित्सालय में उपलब्ध सेवाएं ही मरीज को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी, ऐसी सेवाएं जो उपचार हेतु आवश्यक हैं परंतु निजी चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं है ऐसी समस्त सेवाएं सेवा प्रदायकर्ता की इच्छा अनुसार नि:शुल्क अथवा रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। कलेक्टर जाटव ने बताया कि प्रोजेक्ट अंतर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों के संधारण एवं मॉनिटरिंग हेतु एक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तैयार किया गया हैं।
जिसमें समस्त आवेदन पत्रों की प्रविष्टि की जाएगी। प्रत्येक आवेदन के परीक्षण उपरांत सामान्य परिस्थिति में आवेदक को उसके निवासी क्षेत्र के समीपस्थ निजी चिकित्सालय उपचार हेतु आवंटन पत्र दिया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में एवं बीमारी की गंभीरता को देखते हुए यदि उपचार किसी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल अस्पताल में ही संभव हो तो ऐसी स्थिति में आवदक के उसी निवास क्षेत्र की बाध्यता नहीं रहेगी।

आवेदक मरीजों के लिए ये अनिवार्यता 

आवेदक मध्यप्रदेश का निवासी हो।आवेदक आर्थिक रूप से कमजोर एवं गैर आयकरदाता हो। ऐसे प्रकरणों में जहां इलाज हेतु तुरंत चिकित्सीय सहायता आवश्यक हो एवं उस परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य हो। ऐसे प्रकरण जो वर्तमान में संचालित शासकीय योजनाओं की परिधि में नहीं आते हैं, ऐसे प्रकरणों में आय के सीमित साधन होने से परिवारजन अपने रिश्तेदार अथवा अन्य स्त्रोतों से कर्ज लेकर भी इलाज कराने को बाध्य होते हैं। दूसरी ओर इंदौर जैसे महानगर में निजी क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है एवं बड़ी संख्या में निजी चिकित्सालय स्थापित हैं।
कुछ निजी चिकित्सालय द्वारा स्वयं के स्तर से भी आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के इलाज हेतु सहायता दी जा रही है परंतु इस व्यवस्था को सशक्त करने के लिए एक मंच का अभाव महसूस किया जा रहा था। अत: निशुल्क/रियायती दरों पर इलाज चाहने वाले परिवार एवं निजी चिकित्सालयों में उपलब्ध सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर प्रोजेक्ट आव्हान की कल्पना कलेक्टर लोकेश जाटव द्वारा की गई है।
यदि सेवा प्रदायकर्ता द्वारा नि:शुल्क अथवा रियायती दर पर सेवा उपलब्ध कराने हेतु सहमति नहीं दी गई तो ऐसी स्थिति में उपचार पर किये जाने वाले व्यय मरीज/परिवार द्वारा वहन किया जाएगा, निजी चिकित्सालय द्वारा दी गई सहमति के आधार में उपचार की अधिकतम राशि एक लाख, डेढ लाख अथवा दो लाख हो सकती है। उपचार पर इससे अधिक व्यय आवेदक अथवा अन्य स्त्रोत द्वारा वहन किया जायेगा। प्रोजेक्ट अंतर्गत निजी चिकित्सालय के अतिरिक्त डायग्नोस्टिक सेंटर, दवा विक्रेता, विजिटिंग डॉक्टर आदि से भी नि:शुल्क/रियायती दरों पर सेवा उपलब्ध कराने हेतु सहमति प्राप्त की जा रही है।

उपचार स्वीकृति की यह प्रक्रिया रहेगी

प्रस्तुत आवेदन की संक्षिप्त जांच की जाएगी।
 जांच उपरांत पात्र पाये गये आवेदनों की प्रविष्टि सॉफ्टवेयर में की जाएगी।
निजी चिकित्सालयों द्वारा दी जा रही सेवाओं की मैपिंग सॉफ्टवेयर में की जाएगी।
 सामान्य श्रेणी के प्रकरणों में निवास की निकटता के आधार पर निजी चिकित्सालय का आवंटन किया जाएगा।
विशेष श्रेणी के प्रकरणों में इलाज की आवश्यकता को देखते हुए चिकित्सालय आवंटन किया जायेगा।
 सामान्य श्रेणी के आवेदक को ऑनलाइन सूचीबद्ध कर रैंडम नंबर पद्धति के आधार पर निजी चिकित्सालय का आवंटन किया जाएगा।
 उक्त आवंटन पत्र की दो कॉपी आवेदक को दी जायेगी।
 एक कॉपी चिकित्सालय में जमा होगी एवं एक कॉपी संबंधित निजी चिकित्सालय को ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जाएगी।
 समस्त आवंटन पत्र की सूची ऑनलाइन संधारित की जाएगी।

उपचार की व्यवस्था

🔹आवेदन को आवंटन पत्र निजी चिकित्सालय में प्रस्तुत करना होगा।
🔹आवंटन पत्र में उल्लेखित शर्तों पर एवं निजी चिकित्सालय के भर्ती होने के नियम/प्रावधान आदि पर सहमति आवश्यक होगी।
🔹 निजी चिकित्सालय द्वारा उपचार उपरांत निर्धारित डिस्चार्ज तिथि अनुसार चिकित्सालय छोड़ना होगा।
 🔹उपचार उपरांत फॉलोअप/दवाइयां आदि की व्यवस्था आवेदक द्वारा स्वयं की जाएगी। 🔹चिकित्सालय द्वारा डिस्चार्ज टिकट जारी करने के साथ इसकी प्रविष्टि सॉफ्टवेयर पर की जाएगी।
फीडबैक हेतु पोर्टल पर वेब स्पेस
🔹आवेदक द्वारा चिकित्सालय में प्राप्त सेवा के स्तर, डाक्टर/ स्टॉफ के व्यवहार आदि के संबंध में अपना फीडबेक दिया जा सकता है।
🔹इसी तरह चिकित्सालय द्वारा आवेदक-परिजन के व्यवहार अथवा प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी दी जा सकेगी।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार है।

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