Breaking News

मप्र के विकास के ये दो चेहरे

Posted on: 01 Nov 2018 11:41 by Ravindra Singh Rana
मप्र के विकास के ये दो चेहरे

मुकेश तिवारी
([email protected])

मप्र का आज स्थापना दिवस है। एक नवंबर 1956 को जन्मे इस प्रदेश के विकास का अगर आज भी कोई एक चेहरा बनाने की कोशिश करेगा तो उसकी भूल होगी। दरअसल, विकास के मामले में देश के कई बड़े राज्यों की तरह ही मप्र में भी बड़ी असमानता अब भी है। उसका एक सम्पन्न, समृद्ध और कुछ चमकदार चेहरा सबसे बड़े शहर इंदौर और राजधानी भोपाल में नजर आता है तो विपन्नता और विपदा से भरा चेहरा सुदूर आदिवासी अंचल के आलीराजपुर जैसे जिले में दिखाई पड़ता है।

सरकारें और नेता देश-दुनिया में जब भी मप्र का चेहरा पेश करने की बारी आती है तो उजले चेहरे के नाते इंदौर-भोपाल को आगे करते हैं। जब कोई अंतरराष्ट्रीय एजेंसी आईना दिखाती है तो उसमें एक चेहरा वह भी दिखाई देता है जो आलीराजपुर को देश का सबसे पिछड़ा और गरीब जिला बताता है।

साफ सफाई के मामले में देश में इंदौर के नंबर वन होने और भोपाल के दूसरी पायदान पर आने का जश्न मनता है खुशी-खुशी पुरस्कार लिये जाते हैं। ऐसा करने में कोई बुराई भी नहीं है। कामयाबी पर जश्न मनना भी चाहिए। सवाल यह है जब कामयाबी का श्रेय लेने की होड़ मचती है तो नाकामयाबी की जिम्मेदारी लेने से क्यों बचा जाता है। सत्ताधीशों के चेहरे जब विकास के मामले में इंदौर-भोपाल का जिक्र होते ही चमक उठते हैं तो आलीराजपुर का सवाल आते ही मुंह क्यों बन जाता है।

आप तो सबका साथ, सबका विकास का नारा और झंडा बुलंद किए हुए है ना तो फिर इंदौर-भोपाल और आलीराजपुर के बीच विकास का यह जमीन-आसमान-सा फर्क क्यों दिखाई पड़ता है? वोट अगर शहर के लोग करते हैं तो गांव और सुदूर आदिवासी अंचल के लोग भी तो मतदान करते हैं। कई बार तो इनका वोट प्रतिशत भी शहर से ज्यादा रहता है। मतलब ज्यादा वोट लेकर आप ग्रामीण और आदिवासी अंचल में बसने वाले मप्र को विकास की रोशनी कम ही दे रहे हैं।

कोई भी यह नहीं कह सकता कि 1 नवंबर 1956 को मप्र जिस हालत में जन्मा था वैसा ही आज भी है। उसने 62 साल में विकास तो किया है पर उसकी इस विकास यात्रा में एकरूपता और गति की बेहद कमी है। बुलेट ट्रेन का जमाना आ गया है और मप्र का विकास पैसेंजर ट्रेन की स्पीड से ही दौड़ रहा है। चुनावी मौसम में मेट्रो ट्रेन का सपना जरूर स्पीड पकड़े हुए है पर वह भी इंदौर-भोपाल के लिए। हां प्रदेश के सबसे बड़े शहर और राजधानी के बीच एक्सप्रेस वे की बयार भी फिर चली है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ghamasan. com के संपादक हैं।

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com