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पहरेदार बदला है बस

Posted on: 03 Dec 2018 10:02 by Ravindra Singh Rana
पहरेदार बदला है बस

मुकेश तिवारी
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देश में यह आशंका विपक्ष के मन में प्रबल रहती आई है कि कहीं सत्ता में बैठा दल और नेता मतपेटी या वोटिंग मशीन बदलकर परिणाम अपने पक्ष में ना कर लें। विपक्ष प्रशासनिक तंत्र पर जरा भी भरोसा नहीं करता इसलिए पहले भी वह स्ट्रांग रूम के बाहर पहरेदार था और आज भी पहरेदार बना बैठा है। फर्क बस इतना है कि वक्त के साथ पहरेदार बदल गए हैं। कांग्रेस जब सत्ता में थी तब भारतीय जनता पार्टी के नेता मतपेटियों की सुरक्षा में तैनात रहते थे, बिस्तर बिछाते थे और अलाव तापते नजर आते थे। विपक्ष में होने के कारण अब कांग्रेस के नेता कुछ ऐसा ही करते दिख रहे हैं।

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मतपेटियां बदली जाती हैं या नहीं, वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ की जाती है या नहीं तय तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। हां, मतदान और मतगणना के बीच यह एक तय रस्म हो चली है कि विपक्ष स्ट्रांग रूम के बाहर पहरेदार बनता है जहां पहले मत पेटियां और अब वोटिंग मशीन रखी जाती हैं। वोटिंग मशीन बदले जाने या इनसे छेड़छाड़ होने की शिकायत भी चुनाव आयोग को की जाती है। शिकायत करने वाला अक्सर विपक्षी दल का नेता या प्रत्याशी ही होता है। स्ट्रांग रूम के बाहर नेताओं और प्रत्याशी द्वारा धरना दिए जाने की परंपरा भी पुरानी है। हां मतगणना के दिन शुरुआती दौर में या मुकाबला कशमकश भरा हो जाने पर अब यह तय है कि वोटिंग मशीन की सील टूटी होने का आरोप लगे। हार का ठीकरा भी तो विपक्ष वोटिंग मशीन पर फोड़ने लगा है। हारते ही यह बयान जरूर आता है कि जनता तो हमें भारी बहुमत से जीत रही थी पर वोटिंग मशीन से हुई छेड़छाड़ के बाद हम हार गए इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

चुनाव परिणाम के दिन टीवी चैनलों पर बहस करने आने वाले विपक्ष के प्रवक्ता और नेता भी यह आरोप अपने साथ लेकर आते हैं कि सत्ता में बैठे लोगों ने लोकतंत्र का गला घोंट दिया है। हमने आपने देखा कि किस तरह का जन समर्थन चुनाव प्रचार के दौरान हमारे नेता को मिल रहा था अब आप परिणाम देखिए जरूर दाल में कुछ काला है। जवाब में सत्ता पक्ष के प्रवक्ता और नेता इसे विपक्ष की हार से उत्पन्न खीज और बौखलाहट बताते हैं। साथ ही वह चुनाव आयोग को निष्पक्ष और शांतिपूर्वक मतदान व मतगणना कराने के लिए बधाई भी देते हैं।

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सत्ता बदल जाती है तो जो आज सत्ता में है वह कल विपक्ष में बैठकर उसी वोटिंग मशीन और चुनाव आयोग पर तमाम तरह के सवाल खड़े करते हैं जो सत्ता में रहते हुए वोटिंग मशीन को पवित्र और चुनाव आयोग को निष्पक्ष बताते हुए उसकी पीठ थपथपाते हैं। कभी-कभी तो लगता है कि चुनाव प्रचार के दौरान, मतदान और मतगणना के समय जो शिकायतें की जाती हैं वह केवल दबाव बनाने की राजनीति होती है। राजनीति पक्ष-विपक्ष दोनों ओर से की जाती है पर विपक्ष कुछ ज्यादा ही करता है। उसे ऐसा करना ही है क्योंकि वह विपक्ष है। खैर, इस वक्त मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और उसके नेता स्ट्रांग रूम के बाहर पहरेदार बन कर बैठे हैं। उनका आरोप है कि वोटिंग मशीन के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। मजे की बात यह है कि आज उन्हें ऐसा करते देख जो भाजपा नेता हंसी उड़ा रहे हैं वह भी कुछ साल पहले तक यही सब करते नजर आते थे। तो यह तय हुआ कि जो विपक्ष में होगा वह वोटिंग मशीन पर सवाल उठाएगा सत्ता में आने पर उसी वोटिंग मशीन को पवित्र बतायेगा।

लेखक घमासान डॉट कॉम के संपादक हैं।

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