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मॉडलिंग कर रही मेनका को देखते ही संजय गांधी ने उन्हें अपना दिल दे दिया

Posted on: 28 Mar 2019 17:00 by Surbhi Bhawsar
मॉडलिंग कर रही मेनका को देखते ही संजय गांधी ने उन्हें अपना दिल दे दिया

राजनीति में पारिवारिक विवादों का होना कोई बड़ी बात नहीं, इसमें गांधी परिवार की राजनीति हमेशा से सुर्खियों में रही है। गांधी परिवार राजनीति में दो हिस्सों में बटां हुआ है, एक राजीव गांधी परिवार और दूसरा संजय गांधी परिवार। दोनों परिवार के बीच आपसी विवाद किसी से छुपा नहीं हैं। इंदिरा गांधी की मौत के बाद मेनका गांधी कांग्रेस पार्टी से पूरी तरह अलग हो गई। 2019 लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी भाजपा से यूपी में चुनाव लड़ेंगे।

सामाजिक कार्यों में भी है सक्रिय

मेनका गांधी का जन्म 26 अगस्त 1956 को दिल्ली में हुआ था। राजनीति के अलावा मेनका गांधी माडलिंग, पत्रकारिता, सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रही है। वे हमेशा से पशु व पर्यावरण के प्रति हमेशा से जागरुक रही है। उन्होंने समाज कल्याण के लिए अनगिनत कार्यों को अंजाम दिया है। जैसे कि बच्चे को गोद लेने के कानून में सुधार करना और उन्हें लोगों के लिए आसान बनाना। जो बच्चे फुटपाथ पर रहते है उनके लिए हेल्पलाइन तैयार करना आदि कार्यों को मेनका ने पूरा किया।

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मॉडलिंग कर चुकी है मेनका गांधी

मेनका गांधी राजनीति में आने के पहले माडलिंग कर चुकी है। महज 17 साल की उम्र में मेनका को पहला मॉडलिंग ब्रेक मिला। बॉम्बे डाइंग के एक विज्ञापन के लिए उन्होंने शूटिंग की थी। इसी विज्ञापन में मेनका को देखते ही संजय गांधी उन्हें दिल दे बैठे थे, सिर्फ एक साल में ही संजय और मेनका की लव स्टोरी शादी में बदल गई। संजय गांधी ने 23 सितंबर, 1974 में मेनका से शादी कर ली। 1980 में एक विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई। उस समय मेनका महज 23 साल की थी और उनका बेटा वरुण 3 महिने का था।

शादी के बाद मेनका ने राजनीति में पति संजय गांधी की काफी मदद की। वे उनकी लगभग हर रैली में साथ दिखती थी। उन्होंने संजय और कांग्रेस पार्टी को मजबूती देने के लिए एक मासिक पत्रिका सूर्या का प्रकाशन भी शुरू किया था। संजय की मौत के बाद मेनका और इंदिरा में विवाद हो गया था, जिसके बाद वे हमेशा के लिए इंदिरा का घर और संपत्ति छोड़ कर चली गईं।

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बनाई ‘संजय विचार मंच’ पार्टी

संजय की मौत के बाद मेनका ने राजनीति में खुदकी पार्टी की स्थापना की जिसे “संजय विचार मंच” का नाम दिया। मेनका की पार्टी ने आंध्र प्रदेश से चुनाव लड़ा और चार सीटे हासिल की। 1988 मेनका गांधी की पार्टी जनता दल में शामिल हो गयी। 2004 में वे भाजपा में शामिल हुई। मेनका के समाज के प्रति अच्छे कामों का नतीज रहा है कि आमजनों ने चार सरकारों के कार्यकाल तक उन्हें हमेशा मंत्री बनाया।

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