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क्या यह कांग्रेस की चूक है?

Posted on: 13 Feb 2019 16:25 by Surbhi Bhawsar
क्या यह कांग्रेस की चूक है?

मुकेश तिवारी
([email protected] gmail.com)

सक्रिय राजनीति में पदार्पण करने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका और दायित्व को सीमित कर कांग्रेस ने कहीं बड़ी राजनीतिक चूक तो नहीं कर दी है? यह सवाल राजनीतिक हलकों में उठने लगा है और जिस तरह लखनऊ में उनसे मिलने के लिए उत्साहित कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय पर सुरक्षाकर्मियों से लड़ाई लड़ी उससे इस बात का जवाब भी शायद मिल रहा है। उनके ट्विटर पर जुड़ने के लिए फॉलोअर्स की जो कतार लगी वह भी इसी ओर इशारा कर रही है।

लंबे समय तक और बहुत उठी मांग के बाद प्रियंका सक्रिय राजनीति में आईं और उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह घोषणा जब हुई उसके अगले दिन मैं बड़ी राजनीतिक समझ रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार साथी के साथ बैठा था। चर्चा प्रियंका की चली तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने गलत किया। मैंने सवाल किया क्यों इसमें गलत क्या? जवाब था – प्रियंका की एंट्री धमाकेदार करना चाहिए थी। उनकी नियुक्ति की घोषणा अलग से होना थी और कम से कम उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश की कमान दी जानी चाहिए थी। तब मैं उनकी बातों से कुछ ज्यादा सहमत नहीं था और मैंने कहा था कि कांग्रेस ने किसी रणनीति के तहत ऐसा किया होगा। पूर्वी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की कमान दिया जाना भी चुनौतीपूर्ण दायित्व है। आज लग रहा है कि उनकी बात में दम था। प्रियंका की जिस तरह की लोकप्रियता पिछले कुछ दिनों में नजर आई है उसे देखते हुए वह बड़े दायित्व की हकदार थीं।

देश के सबसे बड़े राज्य के एक हिस्से तक उन्हें सीमित कतई नहीं किया जाना चाहिए था। कांग्रेस ने ऐसा क्यों किया यह उसके रणनीतिकार जानें पर वक्त की मांग शायद यही थी कि सत्ता के फाइनल यानी 2019 के लोकसभा चुनाव में मुकाबला मोदी और प्रियंका के बीच होता तो ज्यादा रोचक होता। कांग्रेस के लिए शायद फायदेमंद भी।

लेखक Ghamasan.com के संपादक हैं।

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