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खूब हुआ चुनाव का शोर, जनता बताएगी मध्यभारत में किसका रहा जोर | Loksabha Elections 2019 who will win in Madhya Pradesh

Posted on: 14 May 2019 18:09 by Surbhi Bhawsar
खूब हुआ चुनाव का शोर, जनता बताएगी मध्यभारत में किसका रहा जोर | Loksabha Elections 2019 who will win in Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश के लिहाज से लोकसभा के चुनावी रण का सबसे प्रमुख चरण छठा चरण होगा। कारण, इसी चरण में राजधानी भोपाल से चुनाव लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्वजयसिंह और मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में बरी हुई साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इसी चरण में उनके गृहनगर राघौगढ़ वाली राजगढ़ लोकसभा सीट भी है। वहां उन्होंने पुत्र जयवर्धनसिंह और भतीजे प्रियव्रतसिंह को मोर्चे पर लगा रखा है।

यहां भाजपा के रोडमल नागर औऱ कांग्रेस की मोना सुस्तानी आमने-सामने हैं। राहुल गांधी द्वारा बड़े भरोसे से उत्तरप्रदेश चुनाव के लिए प्रियंका गांधी के साथ प्रभारी बनाए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की गुना सीट भी इसी चरण का हिस्सा है। उनका मुकाबला कांग्रेस छोड़कर भाजपा में पहुंचे के.पी. सिंह के साथ हो रहा है। मुरैना लोकसभा क्षेत्र से पार्टी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मैदान में उतारा है। वे ग्वालियर सीट छोड़कर यहां आए हैं और कांग्रेसी दिग्गज रामनिवास रावत से मुकाबले में हैं। उन्हें अटलजी के भतीजे अनूप मिश्रा को खो करके टिकट दी गई है।

इससे पहले वे ग्वालियर से लोकसभा के लिए चुने गए थे। चंबल अंचल की दो और सीटों ग्वालियर और भिंड भी इसी चरण में शुमार हैं। ग्वालियर से कांग्रेस के परंपरागत उम्मीदवार अशोक सिंह महापौर विवेक शेजवलकर से संघर्ष कर रहे हैं। बीहड़ों के लिए ख्यात भिंड सीट से भाजपा ने संध्या राय को उतारा है तो उनका मुकाबला कांग्रेस के गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले देवाशीष जरारिया के साथ हो रहा है।

विदिशा की बहुचर्चित सीट भी इसी चरण में है, जहां से इस बार सुषमा स्वराज ने लड़ने से मना कर दिया था। यही सीट रामनाथ गोयनका, अटलजी और शिवराजसिंह चौहान को भी लोकसभा में भेज चुकी है। यहां से शिवराज अपनी पत्नी साधना सिंह को लड़ाना चाहते थे, लेकिन नेतृत्व नहीं माना। भाजपा ने रमाकांत भार्गव और कांग्रेस शैलेंद्र पटेल को मौका दिया। इसी चरण में सागर संसदीय सीट से भाजपा के राजबहादुर सिंह औऱ कांग्रेस के प्रभुसिंह ठाकुर मुकाबला कर रहे हैं। प्रादेशिक स्तर पर इस इलाके को मध्यभारत कहा जाता है और इसमें सिंधिया परिवार ही अपराजेय है। बाकी तो इसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का गढ़ कहा जाता रहा है।

भोपाल-विदिशा जैसी सीटों पर तो कांग्रेस को जीत का मुंह देखे कई दशक हो चुके हैं। कुछ महीने पहले ही कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाई है। उसका कितना असर इस चुनाव पर पड़ता है और मोदी का व्यक्तित्व कोई करिश्मा बता पाता है या नहीं इसका फैसला अगले चौबीस घंटे में मतदाता तो कर ही देंगे। नतीजा जरूर मई के चौथे सप्ताह में सामने आएगा।

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